संघ का स्वयंसेवक विषम परिस्थितियों में भी धैर्य के साथ मार्ग बनाता है : ब्रज प्रान्त प्रचारक

संघ का स्वयंसेवक विषम परिस्थितियों में भी धैर्य के साथ मार्ग बनाता है : ब्रज प्रान्त प्रचारक

मथुरा, 25 अक्टूबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर ब्रज प्रान्त के स्वयंसेवकों ने घोष के विविध वाद्य यंत्रों के साथ गिरिराज महाराज की परिक्रमा कर अपनी श्रद्धा, अनुशासन, साधना और राष्ट्रसेवा के संकल्प का अनूठा परिचय दिया। घोष की मधुर स्वर-लहरियों से परिक्रमा मार्ग गुंजायमान हो उठा। स्वयंसेवकों ने अपनी कला एवं वादन-कौशल का प्रदर्शन करते हुए गिरिराज महाराज के श्रीचरणों में नमन किया और समाजसेवा के पथ पर निरंतर आगे बढ़ने का आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में 350 से अधिक स्वयंसेवकों ने सहभागिता की।परिक्रमा के समापन पर स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए ब्रज प्रान्त प्रचारक धर्मेंद्र ने कहा कि स्वयंसेवक विषम से विषम परिस्थितियों में भी धैर्य, साहस और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने का मार्ग बनाता है। गिरिराज महाराज की परिक्रमा करना अपने आप में श्रद्धा और संकल्प का विषय है, लेकिन वाद्य यंत्रों को लेकर निरंतर घोष वादन करते हुए परिक्रमा पूर्ण करना शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और सामूहिक अनुशासन की कठिन परीक्षा है। ऐसे कार्यक्रम स्वयंसेवकों के भीतर चुनौतियों का सामना करने, कठिन परिस्थितियों में अविचल रहने तथा समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा जाग्रत करते हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय परम्परा में तपस्या, साधना और कठिन संकल्प के माध्यम से लक्ष्य प्राप्त करने की गौरवशाली परम्परा रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी अपने स्वयंसेवकों में इसी प्रकार धैर्य, आत्मविश्वास, सहनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का विकास करने के लिए विविध गतिविधियों का आयोजन करता है। स्वयंसेवक का जीवन केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण का जीवन है।संघ के विभाग प्रचार प्रमुख डॉ. कमल कौशिक ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सौ वर्षों का कालखंड संघर्ष, साधना, संगठन और राष्ट्रसेवा की यात्रा का साक्षी रहा है। संघ ने अपने कार्य के माध्यम से समाज में राष्ट्रभाव, अनुशासन, सेवा और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का प्रयास किया है। आज देशभर में लाखों स्वयंसेवक विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक कार्यों और राष्ट्रहित से जुड़े दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, सनातन परम्पराओं और सामाजिक एकात्मता को सुदृढ़ करने में संघ की भूमिका उसके कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रही है। भारत को विकसित, सशक्त और विश्व के लिए प्रेरणादायी राष्ट्र बनाने की दिशा में समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है। शताब्दी वर्ष में आयोजित कार्यक्रमों ने स्वयंसेवकों को अपने कार्यों की समीक्षा करने, समाज के साथ संवाद बढ़ाने और भविष्य में अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी है।प्रान्त के शारीरिक शिक्षण प्रमुख महावीर ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले वर्ष से अपने शताब्दी वर्ष के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहा था। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य स्वयंसेवकों की गुणवत्ता एवं कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ समाज जागरण, सामाजिक समरसता और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आत्मीयता को मजबूत करना था। अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को जोड़ने तथा सामाजिक सामंजस्य को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।

उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की सफल पूर्णता पर प्रभु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और भविष्य में भी समाजहित के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने की प्रेरणा प्राप्त करने के उद्देश्य से ब्रज की पावन धरा पर घोष के साथ गिरिराज महाराज की परिक्रमा का आयोजन किया गया।श्रीजी की हवेली के निकट परिक्रमा मार्ग पर श्रीजी बाबा परिवार के स्वयंसेवक रमाकांत गोस्वामी ने कहा कि शरद पूर्णिमा भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परम्परा में विशेष महत्त्व रखती है। मान्यता है कि इसी पावन अवसर पर योगीराज भगवान श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। ऐसे मंगलमय अवसर पर घोष वादन के साथ गिरिराज महाराज की परिक्रमा करना श्रद्धा और संस्कृति का अनूठा संगम है। विभिन्न वाद्य यंत्रों पर प्रस्तुत घोष रचनाओं ने परिक्रमा के वातावरण को भक्तिमय एवं उल्लासपूर्ण बना दिया।

विजय बंटा महानगर कार्यवाह ने बताया कि जिस प्रकार सेना और पुलिस में बैंड की परम्परा होती है, उसी प्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में वाद्य यंत्रों के सामूहिक एवं अनुशासित वादन को ‘घोष’ कहा जाता है। घोष की रचनाएं स्वयंसेवकों में अनुशासन, सामूहिकता, एकाग्रता और उत्साह का संचार करती हैं। इस कार्यक्रम में ब्रज प्रान्त के विभिन्न क्षेत्रों से आए घोष वादकों ने अपने-अपने वाद्य यंत्रों के साथ सहभागिता की और गिरिराज महाराज की मान-वंदना करते हुए परिक्रमा पूर्ण की।कार्यक्रम व्यवस्था में लगे विभाग प्रचारक पारस ने बताया कि ब्रज प्रान्त के विभिन्न क्षेत्रों से आए घोष वादकों की व्यवस्था मुरारी वाली कुंज विद्या मंदिर में की गई थी। यहां स्वयंसेवक अपने-अपने वाद्य यंत्रों के साथ घोष रचनाओं का अभ्यास कर रहे थे। कार्यक्रम को लेकर स्वयंसेवकों में विशेष उत्साह था। दानघाटी से प्रारम्भ हुआ घोष संचलन निर्धारित मार्ग से होते हुए गिरिराज महाराज की परिक्रमा के साथ सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम में क्षेत्र शारीरिक शिक्षण प्रमुख नरेश विकल, प्रान्त प्रचारक धर्मेंद्र, सह प्रान्त प्रचारक विनोद, घोष प्रमुख ललित, प्रान्त शारीरिक सह प्रमुख एवं प्रचारक रामशंकर, विभाग कार्यवाह डॉ. संजय, विभाग प्रचार प्रमुख डॉ. कमल कौशिक, शारीरिक प्रमुख शिवकुमार,कुश चाहर जिला प्रचारक जिला प्रचार प्रमुख हीरालाल, सह प्रचार प्रमुख पवन कुंतल, श्याम बाबू कौशिक, चंद्रपाल सिंह, राजू यादव, ज्ञानेंद्र राणा, श्याम उपाध्याय, भानु शर्मा, भूरा पहलवान, राजेश पचौरी सहित 350 से अधिक स्वयंसेवक उपस्थित रहे।घोष की मधुर स्वर-लहरियों, सामूहिक अनुशासन और गिरिराज महाराज के प्रति श्रद्धा के साथ सम्पन्न इस आयोजन ने शताब्दी वर्ष की गतिविधियों को स्मरणीय स्वरूप प्रदान किया। स्वयंसेवकों ने समाजसेवा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित के कार्यों को आगे भी निरंतर गति देने का संकल्प व्यक्त किया।

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