उप्र के 93 नगर निकायों का बनेगा मास्टर प्लान, तय होगा शहरों के विकास का खाका

उप्र के 93 नगर निकायों का बनेगा मास्टर प्लान, तय होगा शहरों के विकास का खाका

लखनऊ, 29 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के 93 नगर निकायों में अब विकास प्राधिकरणों की तर्ज पर मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इसके तहत शहरों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों, सड़कों, पार्कों, जल निकासी तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए व्यवस्थित योजना बनाई जाएगी।नगर विकास विभाग इसके लिए नियमावली में जरूरी प्रावधान शामिल कर प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। योजना पर होने वाला खर्च केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना से वहन किया जाएगा। इस पहल में 50 हजार से एक लाख तक की आबादी वाले नगर निकायों को शामिल किया गया है। इनमें 62 नगर पालिका परिषदें हैं। इनके लिए मास्टर प्लान तैयार करने के उद्देश्य से एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।

इसके लिए जल्द ही निविदा जारी की जा सकती है। शेष नगर निकायों में योजना लागू करने की प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा सामने आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। नगर विकास विभाग मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए आवास विभाग में महायोजना बनाने से संबंधित धारा आठ से 12 तक के प्रावधान अपनी नियमावली में शामिल करेगा। इसके बाद संबंधित शहरों का सर्वे कराया जाएगा।सर्वे के दौरान जमीन के मौजूदा इस्तेमाल, आबादी, सड़कों और उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का आकलन किया जाएगा। इसी आधार पर शहर के भावी विकास का खाका तैयार होगा। महायोजना तैयार करने की प्रक्रिया में स्थानीय नागरिकों से सुझाव और आपत्तियां भी मांगी जाएंगी। इन पर सुनवाई के बाद मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने की कार्रवाई की जाएगी। इससे शहरों के विकास की योजना बनाते समय स्थानीय जरूरतों को शामिल करने का अवसर मिलेगा।

मास्टर प्लान के जरिए यह तय करने में मदद मिलेगी कि शहर के किन हिस्सों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को विकसित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही सड़कों, पार्कों, सार्वजनिक सुविधाओं और जल निकासी व्यवस्था के लिए आवश्यक स्थान को भी नियोजन में शामिल किया जा सकेगा।विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस व्यवस्था से तेजी से बढ़ती आबादी वाले शहरों में अनियोजित निर्माण और बुनियादी सुविधाओं के लिए जगह की कमी जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिल सकती है। भविष्य में सड़क चौड़ीकरण, नालियों और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार की जरूरतों का आकलन पहले से किया जा सकेगा। मास्टर प्लान तैयार करने और संबंधित प्रक्रिया पर होने वाला खर्च अमृत 2.0 योजना के तहत किया जाएगा। इसका उद्देश्य मध्यम आकार के शहरों को भी सुनियोजित विकास की व्यवस्था से जोड़ना है।

हालांकि, मास्टर प्लान तैयार होने के बाद उसकी प्रभावी निगरानी, प्रस्तावों का क्रियान्वयन और पर्याप्त बजट की उपलब्धता भी अहम होगी। इन व्यवस्थाओं के आधार पर ही शहरों में नियोजित विकास के प्रस्तावों को जमीन पर उतारा जा सकेगा। आवास विकास एवं नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी गुरुप्रसाद का कहना है कि 50 से ज़्यादा नगर निकायों में मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल्द ही इसके लिए एजेंसी का चयन टेंडर के माध्यम से किया जाएगा।

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