इंडिया गठबंधन की मॉक संसद में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जन महाभियोग’ प्रस्ताव पारित, देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग

इंडिया गठबंधन की मॉक संसद में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जन महाभियोग’ प्रस्ताव पारित, देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग

नयी दिल्ली, 31 अक्टूबर। विपक्षी इंडिया गठबंधन की ओर से यहां शनिवार को आयोजित मॉक संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘वोट चोरी’ की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने और उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने संबंधी ‘जन महाभियोग’ प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित किया गया।कांग्रेस अध्यक्ष तथा राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित इस मॉक संसद में इंडिया गठबंधन के घटक दलों के नेताओं, सांसदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवा कार्यकर्ताओं और मतदाता सूची से नाम काटे जाने से प्रभावित लोगों ने हिस्सा लिया।

लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार को मॉक संसद का अध्यक्ष तथा समाजवादी पार्टी के अवधेश कुमार को उपाध्यक्ष बनाया गया था। श्री खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जन महाभियोग प्रस्ताव पेश किया जिसे सभा के अंत में श्रीमती मीरा कुमार ने ध्वनिमत से पारित होने की घोषणा की।इससे पहले श्री खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने 2014 से सत्ता पर कब्जा बनाये रखने के लिए कई तरह की साजिशें की हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सांसदों की चोरी, राजनीतिक दलों को तोड़ने, सरकारों को गिराने और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) तथा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी एजेंसियों के इस्तेमाल के बाद अब वोट चोरी भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के वोट काटकर सत्ता में बने रहने की कोशिश की जा रही है।

श्री खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल पद से हटाने, मुख्य चुनाव आयुक्त को कानूनी सुरक्षा देने के लिए दिसंबर 2023 में बनाये गये कानून को वापस लेने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह जन-महाभियोग लोकतंत्र की रक्षा की दिशा में पहला कदम है और रविवार को रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन देश की जनता की आवाज बुलंद करेगा।कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि लोगों की आवाज संसद के भीतर लोकसभा और राज्यसभा में सुनी जानी चाहिए लेकिन विपक्ष को उनकी आवाज वहां तक पहुंचने नहीं दी जा रही है इसलिए उन्हें इस तरह का आयोजन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि श्री ज्ञानेश कुमार इस पूरे मामले का एक हिस्सा हैं और इसके पीछे अन्य लोग भी हैं, जिनके बारे में विपक्ष जानता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग इस रास्ते पर चल रहे हैं वे बदलते राजनीतिक माहौल को समझ लें, क्योंकि जनता के बीच से उभर रहा यह नया राजनीतिक हथियार उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। श्री गांधी ने कहा कि किसी को यह नहीं मानना चाहिए कि उसे कानूनी संरक्षण मिल जाएगा या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह उसे बचा लेंगे। उन्होंने कहा कि रविवार को दिल्ली की सड़कों पर एकजुट विपक्ष देश की जनता का मिजाज दिखाएगा।

समाजवादी पार्टी के हरेंद्र सिंह मलिक ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश कर रहा है और एसआईआर के नाम पर आदिवासियों तथा अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं, ताकि वे मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंच सकें। उन्होंने कहा कि इस कथित गड़बड़ी का पर्दाफाश जनता की अदालत में करने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है।तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने कहा कि भारत के इतिहास में पहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इस तरह का जन-महाभियोग आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाला गठबंधन देश के लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है और पश्चिम बंगाल में लाखों मतदाताओं के नाम काटे गये हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा नाम नहीं काटे जाने का दावा करती है लेकिन यहां मौजूद लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाये गये हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में भी वोट चोरी के जरिये सरकार बनाये जाने का आरोप लगाया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के बजरंग मनोहर ने कहा कि महाराष्ट्र में वोट चोरी का मामला करीब दो वर्ष पहले सामने आया था और बाद में इस तरह की शिकायतें देश के अन्य हिस्सों में भी सामने आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट चोरी के जरिये सरकारें बनाने की साजिश की जा रही है।शिवसेना (यूबीटी) के अरविंद सावंत ने मतदान के बाद शाम के समय अचानक बड़ी संख्या में वोट दर्ज होने पर सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि कई मतदान केंद्रों पर भीड़ नहीं थी, इसके बावजूद मतों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की गड़बड़ियों के पीछे मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठते हैं और पूछा कि उन्हें ऐसे अधिकार किसने दिये हैं।

राष्ट्रीय जनता दल के अभय सिंह कुशवाहा ने कहा कि बिहार में एसआईआर का शुरू से विरोध किया गया और पार्टी नेता तेजस्वी यादव ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में 43 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गये। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने मतदाता अधिकार रैली निकालकर इस मुद्दे को उठाया था जिसकी शुरुआत उनके संसदीय क्षेत्र सासाराम से हुई थी। उन्होंने श्री ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके काम को देशद्रोह जैसा बताया और लोकतंत्र की रक्षा के लिए विपक्षी दलों से एकजुट रहने की अपील की।पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह कार्यक्रम संसद में होना चाहिए था, लेकिन संसद को हाईजैक कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने देश को संविधान दिया, लेकिन उसके मूल सिद्धांतों को किनारे किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि श्री ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाएगा।

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार विपक्ष की बात सुनना नहीं चाहती, लेकिन पिछले 12 वर्षों में पहली बार देश की जनता विपक्ष की आवाज सुन रही है। उन्होंने दावा किया कि देश के 60 प्रतिशत लोग विपक्ष के साथ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया के केंद्रीकरण के साथ ही 2024 से वोट चोरी की धांधली शुरू हुई। उन्होंने सरकार पर संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया।तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि एसआईआर भाजपा की सोची-समझी योजना है और इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह हैं।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के सांसद सुदामा प्रसाद ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने, गिरफ्तार करने और उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग की। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद पी. संतोष कुमार ने कहा कि देश इस समय कठिन दौर से गुजर रहा है और लोकतंत्र की रक्षा के लिए ज्ञानेश कुमार तथा उनके साथ जुड़े लोगों को पद से हटाना जरूरी है। आईसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि देश में लोकतंत्र की रक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है और इसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा उनसे जुड़े लोगों को पद से हटाना होगा। उन्होंने कहा कि देश इस समय महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर प्रयास करना चाहिए।कर्नाटक के नागरिक समाज की ओर से आये नूर शेखर ने दावा किया कि उनके राज्य में डेढ़ करोड़ से अधिक लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाये गये हैं। उन्होंने एक सूची भी प्रस्तुत की, जिसमें कथित तौर पर जीवित लोगों को मृत बताया गया था।स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर लोकतंत्र को व्यवस्थित तरीके से कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग के साथ-साथ देश की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि वह जनसंगठनों और जनांदोलनों की ओर से श्री कुमार के खिलाफ जन-महाभियोग का पूर्ण समर्थन करते हैं।

छात्र कार्यकर्ता ऋतु बराला ने कहा कि संविधान ने लोगों को मतदान का अधिकार दिया है लेकिन एसआईआर के जरिये देशभर में इस अधिकार पर लगातार हमले हो रहे हैं। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी नागरिकों से एकजुट होने की अपील की।कोलकाता से आईं अनिता जायसवाल ने कहा कि वह 2003 में दिल्ली आई थीं और 2012 में उनका मतदाता पहचान पत्र बना था। उन्होंने बताया कि 2012 से 2025 तक उन्होंने प्रत्येक चुनाव में मतदान किया, लेकिन अब उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि वह अकेली मां हैं और रोज कमाकर अपने परिवार का खर्च चलाती हैं। उन्होंने सवाल किया कि उनका वोट क्यों काटा गया और अब उन्हें किस देश का नागरिक माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह नया फॉर्म-6 नहीं भरेंगी, बल्कि अपना पुराना मतदाता पहचान पत्र वापस चाहती हैं।

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