
कानपुर, 02 नवम्बर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर ने सोमवार को अपना 67वां स्थापना दिवस मनाया। संस्थान के मुख्य सभागार में आयोजित समारोह में इसकी गौरवशाली यात्रा, शैक्षणिक उपलब्धियों और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में योगदान को याद किया गया। इस अवसर पर शिक्षा, अनुसंधान, जनसेवा और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 23 लोगों को चार श्रेणियों में सम्मानित किया गया।समारोह में आईआईटी खड़गपुर के पूर्व निदेशक और कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर पार्थ प्रतिम चक्रवर्ती मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में संस्थान के शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी और पूर्व छात्र मौजूद रहे।
संस्थान के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने संस्थान की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अनुसंधान, शिक्षा और प्रौद्योगिकी विकास को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि संस्थान का विशेष ध्यान प्रौद्योगिकी विकास को गति देने, विश्वस्तरीय मौलिक अनुसंधान को मजबूत करने और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शैक्षणिक वातावरण विकसित करने पर है।उन्होंने कहा कि संस्थान ऐसा परिवेश तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है, जहां बौद्धिक जिज्ञासा को प्रोत्साहन मिले और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को उत्कृष्ट अवसर उपलब्ध हों। विभिन्न विषयों के बीच सहयोग बढ़ाना भी प्राथमिकता है। उन्होंने हाल ही में शुरू किए गए ‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत एक अरब अमेरिकी डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल से संस्थान की अनुसंधान, शैक्षणिक और प्रौद्योगिकी विकास संबंधी क्षमताओं को और सशक्त बनाने के लिए संसाधन जुटाए जाएंगे।
मुख्य अतिथि प्रो. पार्थ प्रतिम चक्रवर्ती ने आईआईटी कानपुर को स्थापना दिवस की बधाई देते हुए इंजीनियरिंग शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में उसके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि आईआईटी कानपुर स्वतंत्र भारत की प्रमुख उपलब्धियों में से एक है। यहां शिक्षण के साथ अनुसंधान, नवाचार और रचनात्मकता को भी बढ़ावा दिया जाता है। संस्थान के शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के सामूहिक प्रयासों ने इसकी विशिष्ट पहचान बनाई है।समारोह में इंस्टीट्यूट फेलो पुरस्कार प्रो. इंद्रनील मन्ना और प्रो. वी. चंद्रशेखर को प्रदान किया गया। प्रो. मन्ना को पदार्थ विज्ञान और प्रो. चंद्रशेखर को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार के तहत 15 पूर्व छात्रों को सम्मानित किया गया। इनमें प्रो. प्रकाश पनांगडेन, प्रो. उपमन्यु लाल, प्रो. रवि आहूजा, प्रो. हरीश चंद्र वर्मा, डॉ. पंगनमाला विजय कुमार, प्रो. दीपेंद्र प्रसाद, डॉ. जोसुला रामचंद्र राव, रवि अग्रवाल, लोकवीर कपूर, डॉ. तुषार दीपक चंद्रा, प्रो. संजय ई. सरमा, डॉ. विज्ञान सिंघल, डॉ. सतीश चंद्र, रजत वर्मा और अभिषेक विनोद सिंह शामिल हैं।
सत्येंद्र के. दुबे मेमोरियल पुरस्कार आईआईटी कानपुर के सिविल एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी विभाग के पूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष स्वर्गीय डॉ. गुरु दास अग्रवाल और लखनऊ के पुलिस उप महानिरीक्षक बबलू कुमार को दिया गया। उन्हें ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय मूल्यों के प्रति योगदान के लिए सम्मानित किया गया। वहीं, यंग एलुमनाई पुरस्कार प्रो. अनिंद्य डे, डॉ. नितीश श्रीवास्तव, प्रो. फैज अहमद और निखिल कुरेले को प्रदान किया गया। उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्यों और उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।