
नयी दिल्ली, 02 नवम्बर । पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि सरकार ने अगले 10-11 वर्षों में देश में 500 गीगावॉट नई गैर-जीवाश्म बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा है।श्री मोदी ने आज यहां भारत मंडपम में भारत नवीकरणीय ऊर्जा सम्मेलन और प्रदर्शनी 2026 का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत अब तक करीब 300 गीगावॉट क्षमता हासिल कर चुका है और देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों का हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म क्षमता हासिल करने का संकल्प लिया है और देश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से लेकर पश्चिम एशिया संकट तक दुनिया ने कई बड़े संकट देखे हैं। इसके बावजूद देश ने इन चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना किया और आर्थिक वृद्धि ऊंची बनी रही। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में स्वच्छ ऊर्जा में निवेश और इससे जुड़ी व्यवस्थाएं विकसित करने के कारण भारत बाहरी संकटों से अधिक गंभीर रूप से प्रभावित होने से बचा।प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा सीधे आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है और इसका भविष्य स्वच्छ ऊर्जा में है। जीवाश्म ईंधन के भंडार सीमित हैं और कुछ क्षेत्रों तक केंद्रित हैं, जबकि सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा की संभावनाएं व्यापक हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने पेरिस समझौते के तहत 2030 तक अपनी स्थापित बिजली क्षमता का आधा हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल करने का लक्ष्य 2025 में ही पूरा कर लिया, यानी तय समय से पांच साल पहले। सौर और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है।
श्री मोदी ने कहा कि फरवरी 2024 में शुरू पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत एक करोड़ घरों की छतों पर सौर पैनल लगाने का लक्ष्य है। अब तक 65 लाख से अधिक घर इससे जुड़ चुके हैं। हर छह दिन में एक लाख नए घर इस योजना से जुड़ रहे हैं। एक अध्ययन के अनुसार, इन घरों के बिजली बिल करीब 76 प्रतिशत तक घटे हैं। लाखों परिवारों के बिल शून्य हो गये हैं और कई परिवार अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर कमाई भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना दूसरे देशों, खासकर विकासशील देशों की ऊर्जा सुरक्षा में भी मददगार हो सकती है।उन्होंने कहा कि देश की 44 हजार से अधिक सरकारी इमारतें सौर ऊर्जा से जुड़ चुकी हैं, जिससे हर साल करीब 700 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। कुसुम योजना के तहत 30 लाख से अधिक किसानों को सौर ऊर्जा से सिंचाई की सुविधा मिली है। सौर पंप का लाभ लेने वाले प्रत्येक किसान को सालाना करीब एक लाख रुपये की बचत होने का अनुमान है। उन्होंने तालाबों और झीलों के ऊपर सौर पैनल लगाने वाली पीएम सूर्य सरोवर योजना का भी उल्लेख किया। इससे जल स्रोतों का बेहतर उपयोग हो रहा है और जमीन पर होने वाला खर्च बच रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत इस दशक के अंत तक 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन बनाने का लक्ष्य है। परिवहन क्षेत्र में भी इसका इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। कुछ महीने पहले देश की पहली हरित हाइड्रोजन ट्रेन शुरू की गयी। उन्होंने बताया कि सौर और पवन ऊर्जा को उत्पादन वाले क्षेत्रों से जरूरत वाले इलाकों तक पहुंचाने के लिए हरित ऊर्जा गलियारे बनाये जा रहे हैं। इसके लिए विशेष बिजली लाइनें और सब स्टेशन तैयार किये जा रहे हैं। देश के पांच क्षेत्रीय बिजली ग्रिड को एक नेटवर्क में जोड़ा जा चुका है। इस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करीब दो लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।श्री मोदी ने कहा कि सौर उपकरणों के घरेलू उत्पादन में तेजी से वृद्धि हुई है। एक दशक पहले सौर मॉड्यूल बनाने की क्षमता करीब दो गीगावॉट थी, जो अब 200 गीगावॉट से अधिक हो गयी है। सौर सेल बनाने की क्षमता भी करीब 40 गीगावॉट तक पहुंच गयी है। अन्य उपकरणों का उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान की सफलता का प्रमाण बताया।
प्रधानमंत्री ने सरकारी इमारतों, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और सड़कों की लाइटों को जल्द से जल्द सौर ऊर्जा से जोड़ने की जरूरत बतायी। उन्होंने राज्यों और स्थानीय निकायों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का सुझाव दिया, ताकि अच्छा काम करने वालों को प्रोत्साहन मिले और दूसरे उनसे सीख सकें। किसानों से भी उन्होंने सौर पंप से आगे बढ़कर खाली जमीन और खेतों की मेड़ों पर सौर पैनल लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसान को अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता भी बनना चाहिए।श्री मोदी ने स्टार्टअप, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों से ऐसे सौर ऊर्जा मॉडल विकसित करने का आग्रह किया, जिनसे परिवारों की अधिकतम जरूरतें हर मौसम और चौबीसों घंटे पूरी हो सकें। उन्होंने घरों में सौर बिजली से खाना पकाने, आयातित गैस पर निर्भरता घटाने और इलेक्ट्रिक स्कूटर, बाइक तथा कार को घर की सौर बिजली से चार्ज करने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। इससे मध्यम वर्ग के परिवारों को हर साल हजारों रुपये बचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने डेयरी क्षेत्र, पशुओं के चारे, फसल कटाई और कटाई के बाद के कामों के लिए भी सौर उपकरण विकसित करने की जरूरत बतायी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए देश में बैटरी भंडारण की क्षमता और जरूरी उपकरणों का उत्पादन बढ़ाना होगा। उन्होंने शोधकर्ताओं और निवेशकों से स्वदेशी तकनीक और भंडारण के नये समाधान विकसित करने का आग्रह किया। उनके मुताबिक, स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में उपकरणों के निर्माण, स्थापना, मरम्मत और परिवहन जैसे कामों से रोजगार के हजारों अवसर पैदा हो रहे हैं। भविष्य में सौर ऊर्जा का विस्तार नयी औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार को बढ़ावा देगा।निवेशकों को भारत में अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि देश में बिजली की मांग, बाजार का आकार और नीतिगत स्थिरता निवेश के लिए अनुकूल अवसर दे रहे हैं। पिछले एक दशक में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आया है। वर्ष 2024 के निवेश सम्मेलन के बाद के दो वर्षों में ही करीब छह लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। इस दशक के अंत तक इस क्षेत्र में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश अवसर बनने का अनुमान है।
प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का प्रयास है कि नवीकरणीय ऊर्जा के लिए जरूरी धन, तकनीक और विशेषज्ञता हर जरूरतमंद देश तक पहुंचे। इसी दिशा में अफ्रीका के लिए 20 करोड़ डॉलर की अफ्रीका सौर सुविधा का प्रस्ताव रखा गया है। उन्होंने कहा कि आने वाला दशक जलवायु लक्ष्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। स्वच्छ, हरित और सुरक्षित भविष्य के लिए हर देश और क्षेत्र को इस बदलाव से जोड़ना होगा।