
वाशिंगटन, 02 नवंबर। अमेरिका के रूढ़िवादी टिप्पणीकार टकर कार्लसन ने दावा किया है कि ट्रम्प प्रशासन ईरान पर परमाणु हमला करने की मंजूरी देने के बहुत करीब पहुंच सकता है।श्री कार्लसन ने आरोप लगाया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर ईरान के मध्य क्षेत्र में स्थित एक भूमिगत परमाणु सुविधा को निशाना बनाने के लिए दबाव डाल रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक लंबी पोस्ट में संभावित लक्ष्य के रूप में ‘पिकएक्स माउंटेन’ का जिक्र किया। माना जाता है कि इजरायली खुफिया एजेंसियों को संदेह है कि ईरान ने वहां फिर से परमाणु संवर्धन गतिविधियां शुरू कर दी हैं।
फॉक्स न्यूज के पूर्व होस्ट कार्लसन ने कहा कि अमेरिका के पारंपरिक हथियार शायद उस जगह पर मौजूद भूमिगत सुरंगों को सुरक्षित रखने वाली लगभग 300 फीट मोटी ग्रेनाइट चट्टानों को भेदने में सक्षम न हों। इसी वजह से परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना जताई जा रही है। उन्होंने एक अज्ञात सूत्र के हवाले से कहा, “बिबी (श्री नेतन्याहू) इस बारे में श्री ट्रम्प को हर दिन फोन करते हैं।” उन्होंने ये दावे श्री ट्रम्प द्वारा शनिवार को फ्लोरिडा में ‘मार-ए-लागो’ एस्टेट में पत्रकारों के सामने दिए गए बयानों के बाद किये हैं। श्री ट्रम्प ने कहा था कि ईरान की एक या दो परमाणु सुविधाएं अभी भी संभावित लक्ष्य हैं और अमेरिकी सेना 10 मिनट के भीतर उन पर हमला कर सकती है।श्री ट्रम्प ने विशेष रूप से ‘पिकएक्स माउंटेन’ का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका के पास इस इलाके के लिए सैन्य योजनाएं हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि परमाणु हमले की मंजूरी दे दी गयी है। उन्होंने कहा, “आप शायद ‘पिकएक्स माउंटेन’ पर नज़र डाल सकते हैं, आपको इसे संभालना होगा। हम यह सब बहुत तेज़ी से कर सकते हैं।” इससे पहले श्री ट्रम्प ने 16 अक्टूबर को ‘न्यूज़मैक्स’ को दिये साक्षात्कार में ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना को पूरी तरह से खारिज कर दिया था।
श्री कार्लसन ने आरोप लगाया कि श्री नेतन्याहू फिर से सैन्य कार्रवाई के लिए ज़ोर दे रहे हैं, जिसका एक कारण उनकी घरेलू राजनीतिक मुश्किलें हैं। उन्होंने दावा किया कि इज़रायली प्रधानमंत्री को ‘नेसेट’ में 61 सीटों का बहुमत हासिल करने के लिए अमेरिकी समर्थन की ज़रूरत है, ताकि वे सत्ता खोने और कानूनी जांच का सामना करने से बच सकें। उन्होंने दावा किया कि श्री नेतन्याहू ने अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर सहित कई वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों से ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर से शुरू करने का आग्रह किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) के निदेशक जॉन रैटक्लिफ श्री नेतन्याहू के इस रुख का समर्थन कर रहे हैं।श्री कार्लसन ने कहा कि पश्चिम एशिया में अमेरिका के सहयोगी देश, ईरान के साथ फिर से शुरू होने वाले संघर्ष को लेकर बेहद चिंतित हैं। इसके अलावा, 27 सितंबर को श्री नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ एक अंतिम सैन्य अभियान के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का समर्थन पाने के लिए गुप्त रूप से अबू धाबी की यात्रा की थी, लेकिन अमीराती अधिकारियों ने इससे इनकार कर दिया। संभावित आर्थिक परिणामों के बारे में चेतावनी देते हुए, श्री कार्लसन ने कहा कि महीनों तक चले संघर्ष ने खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुँचाया है और वैश्विक ऊर्जा तथा उर्वरक बाज़ारों को बाधित किया है।
उन्होंने दावा किया कि अक्टूबर के दौरान ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ में दुनिया के लगभग 850 तेल सुपरटैंकरों में से 11 बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गये हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ‘पिकएक्स माउंटेन’ पर परमाणु विस्फोट से पूरे खाड़ी क्षेत्र में रेडियोधर्मी प्रदूषण फैल सकता है, जिससे लगभग 10 करोड़ लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले जल स्रोतों को खतरा हो सकता है।श्री कार्लसन ने कहा कि अमेरिका द्वारा किया गया कोई भी परमाणु हमला, परमाणु हथियारों के प्रसार और तनाव को और बढ़ा सकता है। इससे रूस को यूक्रेन के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने का बढ़ावा मिल सकता है, भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु तनाव फिर से बढ़ सकता है, और उत्तर कोरिया को दक्षिण कोरिया पर हमला करने के लिए उकसाया जा सकता है। उन्होंने लिखा, “पहले परमाणु हमले के बाद, तीसरा विश्व युद्ध होना तय है। वह युद्ध छोटा और निर्णायक होगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि फरवरी से ट्रम्प प्रशासन ने चुपचाप अमेरिकी परमाणु सिद्धांत में बदलाव किया है, ताकि तथाकथित ‘युद्धक्षेत्र’ में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करना आसान हो सके। श्री कार्लसन का दावा है कि श्री ट्रम्प सात नवंबर तक यह तय कर सकते हैं कि ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को मंजूरी दी जाए या नहीं। हालाँकि, उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकोफ राष्ट्रपति से आग्रह कर रहे हैं कि वे ईरान के साथ कोई राजनयिक समझौता करने की कोशिश करें। ऐसा लगता है कि बातचीत मुश्किल होगी, लेकिन ईरान समझौता करने और आगे के टकराव से बचने का इच्छुक दिखाई देता है।इस बीच, ईरान ने ‘पिकएक्स माउंटेन’ कॉम्प्लेक्स में किसी भी तरह की परमाणु गतिविधि से इनकार किया है, जबकि उसके सर्वोच्च नेता ने वाशिंगटन और तेल अवीव को और हमले न करने की चेतावनी दी है।