ईरान के साथ सीधी बातचीत के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के दोहा पहुंचने की संभावना, मध्यस्थता में प्रगति की खबर

ईरान के साथ सीधी बातचीत के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के दोहा पहुंचने की संभावना, मध्यस्थता में प्रगति की खबर

दोहा, 31 अक्टूबर । अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत में प्रगति की खबरों के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के कतर की राजधानी दोहा में ईरानी अधिकारियों के साथ सीधी बातचीत में शामिल होने की संभावना है। कतर के समाचार पत्र ‘अल-अरबी अल-जदीद’ ने शनिवार को यह खबर दी।कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से जुड़ी कोशिशों की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से अखबार ने बताया कि दोनों पक्ष ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही और तेहरान को संभावित आर्थिक प्रोत्साहन देने के मुद्दों पर प्रारंभिक सहमतियों तक पहुंचे हैं। खबर के अनुसार, चीन और रूस किसी संभावित समझौते के गारंटर की भूमिका निभा सकते हैं।

ये घटनाक्रम शुक्रवार को तेहरान में कतर के मध्यस्थों और ईरानी अधिकारियों के बीच 12 घंटे से अधिक समय तक चली बातचीत के बाद सामने आए हैं। समाचार वेबसाइट ‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट के अनुसार, इन चर्चाओं का उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच सीधी वार्ता फिर शुरू कराने का रास्ता तैयार करना था।इसके बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के एक उप सहित ईरानी प्रतिनिधिमंडल आगे की चर्चा के लिए दोहा पहुंचा। ईरानी सूत्र ने कहा कि वाशिंगटन के साथ बातचीत अभी भी कतर के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से हो रही है और दोनों पक्षों के बीच सीधा संपर्क नहीं हुआ है।

मध्यस्थता प्रयासों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के दोहा पहुंचने और ईरानी वार्ताकारों के साथ सीधी बातचीत करने की संभावना है। कई मीडिया रिपोर्टों में एक राजनयिक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि कतर के मध्यस्थ इन प्रयासों के दौरान व्हाइट हाउस के लगातार संपर्क में रहे हैं। सूत्र ने बातचीत में सकारात्मक प्रगति होने की बात कही।तीन नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ फिर सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने की आशंकाओं के बीच ये वार्ताएं हो रही हैं।

‘एक्सियोस’ के अनुसार, कतर दोनों पक्षों से कई दिनों तक एक-दूसरे के अनुरूप कदम उठाने पर सहमति हासिल करने की कोशिश कर रहा है, ताकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य लंबित मुद्दों पर व्यापक बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए परिस्थितियां तैयार हो सकें।बातचीत फिर शुरू करने की शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच अब भी गंभीर मतभेद हैं। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान वार्ता दोबारा शुरू होने से पहले परमाणु कार्यक्रम पर रियायतें दे। ईरान ने अमेरिका से नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, ईरान की जब्त संपत्तियां जारी करने और तेल निर्यात की अनुमति देने की मांग की है।

कतर के मध्यस्थ ईरान को उन परमाणु ठिकानों पर संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को जाने की अनुमति देने के लिए भी राजी करने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें पहले के हमलों में नुकसान पहुंचा था। इसके बदले अमेरिका की ओर से प्रतिबंधों में राहत दिए जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है।इस बीच, ‘अल अरबिया इंग्लिश’ ने बताया कि चर्चा के तहत प्रारंभिक मसौदा ढांचे में ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को किसी तीसरे देश में स्थानांतरित करने या उसके संवर्धन स्तर को कम करने का प्रस्ताव शामिल है।

मसौदे में प्रारंभिक सहमति बनने के सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए फिर खोलने और दोहा में अमेरिका-ईरान के बीच सीधी बातचीत कराने का भी प्रस्ताव है।खबरों के अनुसार, चीन समझौते के क्रियान्वयन का गारंटर बन सकता है। प्रस्ताव में प्रतिबद्धताओं के स्वतंत्र सत्यापन, चरणबद्ध क्रियान्वयन और विवादों के समाधान के लिए एक तंत्र का प्रावधान भी शामिल है।

ईरान के प्रति आगे की रणनीति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के भीतर भी मतभेद सामने आए हैं। ‘एक्सियोस’ ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और विदेश मंत्री मार्को रुबियो मौजूदा ईरानी सरकार के साथ परमाणु समझौता होने की संभावनाओं को लेकर संदेह जताते हैं और आगे सैन्य दबाव बनाने के पक्षमें हैं।

इसके विपरीत, उपराष्ट्रपति जे डी वेंस और श्री ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ तथा जैरेड कुशनर नए सिरे से कूटनीतिक बातचीत शुरू करने के पक्ष में हैं। श्री ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है, लेकिन उन्होंने इस बात पर अनिश्चितता जताई कि क्या ईरान अमेरिका के स्वीकार्य समझौते पर सहमत होगा।इस बीच, मिस्र, तुर्की, इराक, पाकिस्तान और सऊदी अरब सहित क्षेत्रीय शक्तियां भी ईरान पर बातचीत की मेज पर लौटने के लिए दबाव बना रही हैं। कूटनीतिक पहल ऐसे समय हो रही है, जब नए सिरे से संघर्ष शुरू होने की आशंका है। इससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव फैल सकता है, ऊर्जा ढांचे को खतरा हो सकता है और वैश्विक तेल आपूर्ति में और बाधा आ सकती है।

ईरान ने चेतावनी दी है कि उसके ऊर्जा ढांचे पर अमेरिकी हमलों के जवाब में वह पूरे खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस प्रतिष्ठानों को निशाना बना सकता है। ईरान के खिलाफ अमेरिका की किसी भी नई सैन्य कार्रवाई में इजरायल भी शामिल हो सकता है। ऐसी स्थिति में ईरान की ओर से मिसाइल हमले किए जाने की आशंका है। संघर्ष और बढ़ने की स्थिति में हिज्बुल्लाह की संभावित भागीदारी को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रहने के बावजूद वाशिंगटन और तेहरान, दोनों में से किसी ने भी दोहा में सीधी बातचीत होने या खबरों में बताए गए प्रारंभिक मसौदा ढांचे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इस बीच, मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आदेश मिलने के 96 घंटे के भीतर ईरान के खिलाफ नई और संभावित रूप से बड़े पैमाने की सैन्य कार्रवाई शुरू करने के लिए तैयार है।

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