
लखनऊ, 03 नवंबर । केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि भारत खाद्यान्न उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर है और चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़कर दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने किसानों से मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर जरूरत के अनुसार ही उर्वरकों का इस्तेमाल करने की अपील की।श्री चौहान यहां भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईआईएसआर) में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत आयोजित किसान चौपाल को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने किसानों से सीधा संवाद किया और खेती की चुनौतियों, मिट्टी की उर्वरता तथा कृषि को टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने के उपायों पर चर्चा की।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त उत्पादन हो रहा है और अन्न भंडार भरे हुए हैं। किसानों ने देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब उत्पादन बढ़ाने के साथ धरती की सेहत सुरक्षित रखना भी जरूरी है।उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 374 ग्रामीण सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी है। इसके लिए 544.62 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क से किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होगी। केंद्र ने उत्तर प्रदेश में तिल और मूंगफली की खरीद को भी मंजूरी दी है, जिससे इन फसलों के किसानों को लाभ मिलेगा।
श्री चौहान ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से मिट्टी की जांच कराकर उसकी वास्तविक जरूरत के अनुसार ही खाद का उपयोग करना चाहिए। अत्यधिक उर्वरक और कीटनाशकों के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है तथा फसलों के लिए उपयोगी जीव भी नष्ट होते हैं। संतुलित उर्वरक प्रबंधन और कीटनाशकों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल जरूरी है।उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की अपील करते हुए कहा कि पांच बीघा जमीन वाले किसान कम से कम एक बीघा में प्राकृतिक खेती का प्रयोग करें। इससे मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री ने किसानों से फसल विविधीकरण और एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसान केवल एक फसल पर निर्भर न रहें, बल्कि अपनी जमीन और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार फल, सब्जियां, दालें और अन्य फसलें भी उगाएं। फसल चक्र में बदलाव और विविधीकरण से खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकता है।कार्यक्रम की शुरुआत पौधरोपण से हुई। श्री चौहान ने संस्थान परिसर में पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक, कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।