
कानपुर 03 नवम्बर। प्रशासनिक लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते कानपुर के गोविंदनगर क्षेत्र में हर साल की तरह इस बार भी सूर्योपासना का महापर्व ‘छठ पूजा’ गंदगी से लबरेज सीटीआई नहर के तट पर मनायी जायेगी।कानपुर जिले में नौरैयाखेड़ा से गुजैनी के बीच लगभग 37 किमी लंबी नहर आसपास के ग्रामीण इलाकों में सिंचाई के काम आती है मगर नहर के दोनो ओर घनी बस्ती खासकर संजय नगर और कच्ची बस्ती होने के कारण क्षेत्रीय लोग कूड़ा करकट नहर में फेंकते रहते है,नतीजन नहर लगभग पूरे साल नाले की शक्ल में नजर आती है। जब कभी सिंचाई विभाग नहर में पानी छोड़ता है, तो नहर कूड़े के अंबार और जमा सिल्ट के कारण ओवरफ्लो हो जाती है और इसका पानी निचले इलाकों में भर जाता है।
मानसून से पहले सीटीआई के पास नहर की सफाई की औपचारिकता पूरी भी की जाती है मगर सिल्ट का अधिकांश हिस्सा नहर के किनारे ही छूटा मिलता है जो बरसात में घुल कर फिर से नहर में मिल जाता है। हर साल की तरह इस बार भी छठ पर्व से पहले गंदगी से पटी नहर के एक टुकड़े से कचड़ा हटाने का काम पूरा शुरु हुआ है। नहर के ऊपरी हिस्से में पालीथीन, कचड़ा आदि को उठाने के बाद तेज रफ्तार से पानी छोड़ा जायेगा और करीब डेढ़ किमी तक नहर के घाट को चूना आदि छिड़क कर साफ सुथरा दिखाया जायेगा जो इलेक्ट्रिक झालरों की रोशनी जगमगायेगा। हालांकि नहर की तली में जमा सिल्ट और गंदगी के बीच श्रद्धालु सूर्य को जब अर्घ्य देंगे तो यह आस्था के साथ सरासर खिलवाड़ होगा।चुनावी साल होने के नाते छठ के अवसर पर क्षेत्रीय नेता और विधायक आदि भी श्रद्धालुओं को छठ की शुभकामना देते नजर आयेंगे मगर सवाल यह है कि साल भर गंदगी से बजबजाती नहर पर इन्ही जनप्रतिनिधियों और अफसरों का ध्यान क्यों नहीं जाता जबकि सरकार नहर की साज सफाई के लिये भारी भरकम बजट का प्रावधान करती है। नहर में पसरी गंदगी से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी हर समय बना रहता है।
इस बारे में नहर विभाग के अधिशाषी अभियंता महेन्द्र सिंह ने कहा कि नहर की सिल्ट साफ करने का जिम्मा उनके विभाग का है मगर कूड़ा करकट उठाने की जिम्मेदारी नगर निगम को निभानी होगी। यह व्यवस्था करनी होगी ताकि आसपास के लोग नहर में कूड़ा न फेंक सकें।हाल ही में महापौर प्रमिला पांडे ने सीटीआई में जमा गंदगी के प्रति नाराजगी जताते हुये सिल्ट हटाने के निर्देश दिये थे। साथ ही नहर की टूटी दीवार की मरम्मत और लीकेज बंद कराने को भी कहा गया था। गौरतलब है कि पिछले दिनो सीटीआई नहर के सुंदरीकरण के लिये सात करोड़ रुपये का प्रस्ताव मंजूर किया गया था जिसमें साढे तीन करोड़ की पहली किस्त भी जारी होने की रिपोर्ट मिली थी मगर नहर में पसरी गंदगी अब भी जस की तस है।