
नयी दिल्ली, 03 नवम्बर । सेना ने भविष्य के युद्धों में अभियान क्षमता, निगरानी और फैसले लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए अंतरिक्ष आधारित तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया है।सेना ने मंगलवार को यहां मानेकशॉ सेंटर में ‘उभरता युद्धक्षेत्र : थल सेना के लिए अंतरिक्ष का उपयोग’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की, जिसमें सुरक्षित उपग्रह संचार, अंतरिक्ष से निगरानी और दुश्मन की अंतरिक्ष क्षमताओं को निष्क्रिय करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। संगोष्ठी में तीनों सेनाओं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), रक्षा और अंतरिक्ष उद्योग, शोध संस्थानों तथा शिक्षण जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
संगोष्ठी के पहले सत्र में अंतरिक्ष आधारित निगरानी, खतरों का आकलन और अलग-अलग सेंसर से मिलने वाली सूचनाओं को जोड़कर बेहतर फैसले लेने पर चर्चा हुई।दूसरे सत्र में दुश्मन की ओर से उपग्रह आधारित सेवाओं में बाधा डालने, संचार और दिशा बताने वाली प्रणालियों को प्रभावित करने तथा मिसाइलों की पहचान और निगरानी से जुड़े मुद्दे उठे। तीसरे सत्र में सेना के अभियानों के लिए सुरक्षित उपग्रह संचार, मजबूत सैन्य संचार नेटवर्क और नयी उपग्रह प्रणालियों के इस्तेमाल पर विचार किया गया।
समापन सत्र में इसरो के एसोसिएट निदेशक डॉ. एसके गुप्ता ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे विकास और थल सेना के लिए उससे मिलने वाले अवसरों पर बात की। संगोष्ठी में स्वदेशी नवाचार और सेना, उद्योग तथा शोध संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया, ताकि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को सेना की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप इस्तेमाल किया जा सके।