
नयी दिल्ली 03 नवंबर। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बहस करने की कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुनौती की कड़ी आलोचना करते हुए मंगलवार को कहा कि सही बहस समान स्तर के व्यक्तियों के बीच होती है, व्यक्तियों के बीच होती है तथा श्री गांधी की चुनौती के लिए के लिए भाजपा के कनिष्ठ कार्यकर्ता ही पर्याप्त है।गृहमंत्री अमित शाह ने श्री गांधी पर तंज करते हुए उनको पहले भाजपा के किसी युवा नेता का मुकाबला करने की चुनौती दी। उन्होंने श्री गांधी पर पलटवार करते हुए कहा,” राहुल गांधी को बहस की चुनौती देने के लिए प्रधानमंत्री की आवश्यकता नहीं है, बल्कि भाजपा के युवा मोर्चा अध्यक्ष ही उनके लिए काफी हैं।
संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजीजू ने सोशल मीडिया पर कहा,”उच्च स्तरीय बहसें समझदार और परिपक्व लोगों के बीच होती हैं।”श्री रिजीजू ने साथ में यह भी कहा,” यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे इस्लामी कट्टरपंथी धर्मनिरपेक्षता की बात करें, अलगाववादी भारतीय झंडे थामें, या अराजकतावादी संविधान की किताब दिखायें। भारत के दुश्मनों के एजेंडे को आगे बढ़ाना और साथ ही दूसरों पर विदेशी समर्थन का आरोप लगाना, खुद का ही मज़ाक उड़ाने जैसा है।”
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने श्री गांधी पर जुबानी हमला करते हुए कहा,” सिर्फ बयान बहादुर मत बनिए, हिम्मत है तो गृहमंत्री जी की चुनौती स्वीकार कीजिए या भाजपा के किसी कर्मठ कार्यकर्ता से बहस करके दिखाइए! माननीय प्रधानमंत्री जी से नाम जोड़कर हेडलाइंस बटोरने की राजनीति बंद कीजिए!”पार्टी के सांसद डॉक्टर निशिकांत दुबे ने एक्स पर एक पोस्ट में विपक्ष के नेता श्री गांधी को चुनौती देते हुए कहा,’ मैं कॉंग्रेस ऑफिस में आकर आपसे काग़ज़,मुद्दे और आपके साथ विदेशी शक्तियों के सहयोग पर डिबेट करने को तैयार हूँ,दिन और समय तय कर लीजिए । मुझसे संतुष्ट हो जाइए फिर हमारे नेताओं को चैलेंज करिए”
गौरतलब है कि श्री गांधी ने एक्स पर अपने पोस्ट में कहा है, ” प्रधानमंत्री विपक्ष को देशद्रोही बताते हैं इसलिए उन्हें किसी भी मंच पर आमने-सामने बैठकर बहस करनी चाहिए। बहस में विदेशी ताकतों से कथित संबंधों, वित्तीय व्यवस्था, अमेरिका के साथ हुए समझौते तथा समझौते में जल्दबाजी करना, मंत्रिमंडल को इसकी जानकारी नहीं देना तथा उद्योगपति अडानी के मामले सहित सभी मुद्दों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि बहस में मीडिया और देश के युवा मौजूद रहें तथा प्रधानमंत्री अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति को निर्णायक बना सकते हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत को भी निर्णायक बनाया जा सकता है।