
वाशिंगटन, 04 नवंबर । अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है और उनके कार्यकाल के शेष दो वर्षों में राजनीतिक टकराव बढ़ने के आसार हैं।
प्रतिनिधि सभा और सीनेट में डेमोक्रेट्स की जीत से वाशिंगटन में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। इससे विपक्ष को राष्ट्रपति के फैसलों की जांच करने और उनके घरेलू एजेंडे को चुनौती देने की अधिक शक्ति मिलेगी। यह स्थिति वर्ष 2028 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले श्री ट्रंप के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकती है।
चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी का दोनों सदनों पर नियंत्रण था, लेकिन डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने देशभर में बढ़त हासिल की। उन्हें उन राज्यों में भी सफलता मिली, जहां परंपरागत रूप से रिपब्लिकन पार्टी का प्रभाव रहा है। डेमोक्रेट्स ने सीनेट की कम से कम सात रिपब्लिकन-नियंत्रित सीटें जीत लीं। इनमें कंसास, आयोवा, टेक्सास, ओहायो, मेन, उत्तरी कैरोलिना और दक्षिण कैरोलिना शामिल हैं।
प्रतिनिधि सभा के चुनाव परिणाम भी उतने ही महत्वपूर्ण रहे। डेमोक्रेट्स ने ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की, जहां 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में श्री ट्रंप को 18 प्रतिशत अंकों तक की बढ़त मिली थी। इससे 435 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में पार्टी को बहुमत हासिल करने में मदद मिली।
टेक्सास में सबसे बड़े राजनीतिक बदलावों में से कुछ देखने को मिले, जहां डेमोक्रेट्स ने राज्य स्तर के चुनावों में भी महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। ये नतीजे इसलिए भी उल्लेखनीय हैं क्योंकि रिपब्लिकन पार्टी ने कांग्रेस के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण कर डेमोक्रेट्स के कब्जे वाली पांच अतिरिक्त सीटें जीतने की कोशिश की थी। इसके बावजूद शुरुआती नतीजों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार रिपब्लिकन समर्थक माने जाने वाले क्षेत्रों में भी बढ़त बनाते दिखे।
दक्षिणी और मध्य-पश्चिमी राज्यों में डेमोक्रेट्स को कुछ महत्वपूर्ण सफलताएं मिलीं। टेक्सास में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको ने सीनेट सीट जीत ली। इस राज्य में वर्ष 1988 के बाद किसी डेमोक्रेट उम्मीदवार ने सीनेट चुनाव नहीं जीता था। वहीं, जीना हिनोजोसा ने रिपब्लिकन उम्मीदवार और मौजूदा गवर्नर ग्रेग एबॉट को हराकर राज्य की पहली लातिना गवर्नर बनने का रास्ता साफ किया।
डेमोक्रेट्स ने जॉर्जिया, आयोवा और ओहायो में भी गवर्नर पद के चुनाव जीते। इसके अलावा उत्तरी कैरोलिना की राज्य प्रतिनिधि सभा और विस्कॉन्सिन की सीनेट में भी नियंत्रण हासिल किया।
चुनाव परिणाम किसी एक क्षेत्र तक सीमित राजनीतिक बदलाव के बजाय देशव्यापी असंतोष का संकेत देते हैं। मतदाताओं की प्रमुख चिंताओं में जीवनयापन की बढ़ती लागत, ईंधन और घरेलू खर्च, सरकारी भ्रष्टाचार को लेकर आशंकाएं तथा ईरान से जुड़े युद्ध के प्रबंधन पर प्रशासन के प्रति असंतोष शामिल रहे। युवा और हिस्पैनिक मतदाताओं के बीच डेमोक्रेट्स की बढ़त ने उस मतदाता गठबंधन को भी कमजोर किया, जिसने 2024 में श्री ट्रंप की जीत में मदद की थी।
आम अमेरिकी नागरिकों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस में सत्ता परिवर्तन से उनकी रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान हो सकेगा। डेमोक्रेट्स से महंगाई और सामर्थ्य, स्वास्थ्य सेवाओं, आवास, मजदूरी तथा उपभोक्ता खर्च से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई की मांग उठाने की उम्मीद है। वे प्रशासन की ऊर्जा, व्यापार और कर नीतियों के कुछ पहलुओं को भी चुनौती दे सकते हैं।
कांग्रेस में नियंत्रण बदलने से महंगाई, पेट्रोल की कीमतों या बिजली के बिलों में अपने आप कमी नहीं आएगी। ये परिणाम व्यापक आर्थिक परिस्थितियों, वैश्विक ऊर्जा बाजार, आपूर्ति शृंखला और ऐसी नीतिगत फैसलों पर निर्भर करते हैं, जिनका असर दिखने में समय लग सकता है।
ऊर्जा की कीमतें विशेष रूप से संवेदनशील मुद्दा बनी रह सकती हैं। ईरान से जुड़े संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है, जबकि शुल्क और व्यापार विवादों से कारोबारियों तथा उपभोक्ताओं की लागत बढ़ सकती है। डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाली कांग्रेस इन मुद्दों पर प्रशासन के फैसलों और खर्च की समीक्षा कर सकती है, लेकिन वह वैश्विक तेल कीमतों को सीधे नियंत्रित नहीं कर सकती और न ही बाजार के दबावों को तुरंत खत्म कर सकती है।
श्री ट्रंप के लिए इस चुनाव के राजनीतिक परिणाम काफी महत्वपूर्ण होंगे। प्रतिनिधि सभा पर नियंत्रण मिलने से डेमोक्रेट्स को समितियों की अध्यक्षता, जांच शुरू करने, समन जारी करने और प्रशासन के कामकाज की पड़ताल करने का अधिकार मिलेगा। सीनेट में बहुमत से उन्हें विधायी प्रक्रिया और सदन के कामकाज पर भी अधिक प्रभाव मिलेगा। इसमें राष्ट्रपति की ओर से की जाने वाली नियुक्तियों पर विचार करना भी शामिल है।
नई प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के हकीम जेफ्रीज को अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है। यदि उनके सहयोगी उन्हें इस पद पर चुनते हैं, तो वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले अश्वेत अमेरिकी होंगे।
नतीजों से श्री ट्रंप के लिए अपने घरेलू एजेंडे को कानून का रूप देना कठिन हो जाएगा। अब विधेयकों को पारित कराने के लिए उन्हें डेमोक्रेट्स के साथ बातचीत करनी होगी। सरकारी वित्तपोषण, कराधान, आव्रजन और खर्च जैसे मुद्दों पर मतभेद के कारण बार-बार राजनीतिक टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। कांग्रेस की निगरानी भी तेज होने की संभावना है, जिससे वर्ष 2028 के राष्ट्रपति चुनाव तक प्रशासन पर लगातार दबाव बना रह सकता है।
श्री ट्रंप को शक्तिहीन या पूरी तरह विदाई की स्थिति में पहुंचा हुआ राष्ट्रपति मानना भी जल्दबाजी होगी। उनका कार्यकाल जनवरी 2029 तक है और उनके पास संघीय सरकार, कूटनीति तथा सशस्त्र बलों से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार बने रहेंगे। उन्हें विधेयकों पर वीटो लगाने का अधिकार भी है। विरोधी दलों के नियंत्रण वाली कांग्रेस उनके विधायी एजेंडे को रोक सकती है या उसमें बदलाव कर सकती है तथा उनके प्रशासन की जांच कर सकती है, लेकिन वह राष्ट्रपति पद का नियंत्रण अपने हाथ में नहीं ले सकती और न ही उनके प्रत्येक कार्यकारी फैसले को पलट सकती है।
इस तरह मध्यावधि चुनाव के नतीजों से अमेरिका में विभाजित सरकार के एक नए दौर की शुरुआत होगी, जहां कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होगा, जबकि राष्ट्रपति पद रिपब्लिकन पार्टी के पास रहेगा। अमेरिकी मतदाताओं के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया बहुमत चुनावी जनादेश को आम लोगों के जीवन में ठोस सुधार में बदल पाता है या नहीं। वहीं, ट्रंप के सामने ऐसी कांग्रेस के साथ सरकार चलाने की चुनौती होगी, जिस पर अब उनकी पार्टी का नियंत्रण नहीं है।