
अयोध्या, 07 नवंबर। उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या शनिवार को दीपोत्सव के दसवें संस्करण में 30 लाख से अधिक दीपों की रोशनी से जगमगा उठी। राम की पैड़ी सहित सरयू नदी के तट पर स्थित 56 घाटों पर एक साथ प्रज्ज्वलित दीपों ने भव्य दृश्य प्रस्तुत किया।इस अवसर पर 2,100 ड्रोन से रामायण प्रसंगों पर आधारित शो, लेजर प्रदर्शन, प्रोजेक्शन मैपिंग और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया। समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि जब उन्होंने प्रदेश की सत्ता संभाली थी तो उन्हें बताया गया था कि अयोध्या में दीपोत्सव की कोई परंपरा नहीं है। इस पर उन्होंने सवाल किया था कि जिस नगरी ने दुनिया को दीपावली का पर्व दिया, वहां अपना दीपोत्सव क्यों नहीं होना चाहिए। वर्ष 2017 में शुरू हुआ यह आयोजन अब अपने दसवें संस्करण में भव्यता के नए शिखर पर पहुंच गया है।योगी ने रामभक्तों पर गोली चलवाने और संतों पर लाठीचार्ज कराने वालों को निशाने पर लेते हुए कहा कि ऐसे लोग अयोध्या जरूर आएं, लेकिन पहले रामभक्तों और संतों से माफी मांगें तथा अपने कृत्यों का पश्चाताप करें। प्रभु श्रीराम करुणा के सागर हैं, वे उन्हें भी क्षमा कर देंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या में अब कभी कर्फ्यू नहीं लगेगा और न ही कोई रामभक्तों पर गोली चलाने या संतों का अपमान करने का दुस्साहस कर सकेगा।
उन्होने रामजन्मभूमि आंदोलन में कारसेवकों के बलिदान, संतों के संघर्ष और अशोक सिंघल के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि रामभक्तों ने जो इतिहास रचा है, उसे मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने न्यायालयों में वकीलों की फौज खड़ी कर भगवान श्रीराम के अस्तित्व को नकारने का प्रयास किया था, लेकिन आज वे भी राम के अस्तित्व को स्वीकार कर रहे हैं। यह वैचारिक विजय है।मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम भारत राष्ट्र की जीवन शक्ति और आत्मसम्मान के प्रतीक हैं। उनकी चेतना ही भारत की चेतना है। आज सजी-संवरी अयोध्या 14 वर्ष के वनवास के बाद प्रभु श्रीराम की वापसी पर हुए भव्य स्वागत की स्मृतियों को जीवंत कर रही है। उन्होंने निषादराज, माता शबरी और वनवासी समुदायों के प्रति श्रीराम के अपनत्व का उल्लेख करते हुए इसे सामाजिक समरसता का आदर्श बताया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में करीब 40 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं पर काम किया गया है या कार्य जारी है। कभी अयोध्या में महज तीन घंटे बिजली मिलती थी, लेकिन आज यह स्मार्ट सिटी के साथ सोलर सिटी भी बन चुकी है। धर्म पथ, भक्ति पथ, श्रीराम पथ और जन्मभूमि पथ श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, राम की पैड़ी में सरयू का प्रवाह तथा माता शबरी के नाम पर रसोई और निषादराज के नाम पर रैन बसेरे आधुनिक अयोध्या की पहचान बन रहे हैं।मुख्यमंत्री ने दीपोत्सव को उन संतों, भक्तों और कारसेवकों के त्याग एवं बलिदान को समर्पित किया, जिनके संघर्ष ने राम मंदिर आंदोलन को निरंतर ऊर्जा दी।