हिंदुस्तानियों के पास है विरासत को संभालने का कमाल :योगी

हिंदुस्तानियों के पास है विरासत को संभालने का कमाल :योगी

गोरखपुर 13 जनवरी ! उत्तर प्रदेश के  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया के तमाम सभ्यताएं एवं संस्कृतियां समाप्त हो गईं मगर  भारत आज भी हजारों वर्षों की सभ्यता और संस्कृति को संजोए हुए है और  तमाम जंझावतों में भी विरासत को संभालने का कमाल हिंदुस्तानियों के पास है।      
     योगी ने शनिवार को तीन दिवसीय गोरखपुर महोत्सव 2024 के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहा कि  श्रीराम हजारों वर्ष पूर्व अवतरित हुए थे लेकिन उनकी हजारों वर्षों की परंपरा से हर भारतीय जुड़ा हुआ है। विरासत को संभालने की परंपरा और इसके लिए हर स्तर के संघर्ष का ही प्रतिफल है कि 22 जनवरी को अयोध्या में प्रभु श्रीराम एक बार फिर अपने भव्य मंदिर में विराजमान होने जा रहे हैं।      
     उन्होंने कहा कि अपने इतिहास, लोक परंपरा और लोक संस्कृति को संजोना भारत की विशेषता है। संरक्षण की यही भावना भारत को बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि अयोध्या को लक्षित कर संस्कृति और आस्था पर आघात करने वालों को परास्त और पददलित कर उनका भारतीयों ने नामोनिशान मिटा दिया और आज प्रभु श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के साक्षी बनने जा रहे हैं।      
      मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पर्व व त्यौहार अद्भुत हैं, इनके जरिए उन लोगों तक भी भारतीय संस्कृति का संचार होता है जो किन्हीं कारणों से इसे जानने से वंचित रह गए हों। दीपावली, होली, रामनवमी, महाशिवरात्रि, रक्षाबंधन जैसे पर्व इसके उदाहरण हैं। इन सभी पर्वों में विशेष संदेश निहित है। इसी तरह महोत्सव को भी संदेश देने का वाहक बनना चाहिए।      
       अयोध्या में हजारों वर्ष पहले भगवान राम का प्रकटीकरण हुआ फिर भी उस परंपरा को आज भी हर भारतवासी अपने मन में समेटकर रामनवमी के साथ जुड़ता है। रामनवमी पर वर्ष 2023 में अयोध्या में 35 लाख लोग आए। अयोध्या में तब न रेल सेवा अच्छी थी न एयरपोर्ट था। सड़के भी निर्माणधीन थीं।      
       उन्होंने कहा कि आज तो अयोध्या फोरलेन एवं सिक्स लेन की कनेक्टविटी से जुड़ चुका है। रेलवे भी डबल लाइन से जुड़ चुकी है। नये एयरपोर्ट पर एक साथ 8 विमान लैण्ड कर सकते है। आज वहां धर्मशाला एवं अच्छे होटल भी उपलब्ध है। वहां कुम्भ की तरह एक टेंट सिटी भी बसाई जा रही है। इसी प्रकार श्री कृष्ण जन्मोत्सव का कार्यक्रम भी होता है। 5 हजार वर्ष बाद भी हम उसी उत्साह से अपनी इस परम्परा को आनंद एवं उत्साह से मनाते हैं। रात्रि के 12 बजे हर जनपद, हर घर एवं हर थाने, मंदिर, में कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। जेल भी इस उत्सव का मंच बनता है और ऐसा केवल भारत में ही होता है।

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