
अयोध्या, 19 जनवरी । अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर में विराजमान मनोहारी रामलला के श्यामल विग्रह के अनुष्ठान कार्यक्रम में हवन कुण्ड में अग्नि प्रज्ज्वलित करने के लिये शुक्रवार को अरणी मंथन किया गया।
काशी से आये अरुण कुमार दीक्षित ने बताया कि कुश की बनायी हुई कुटिया में 121 ब्राह्मण धार्मिक कर्मकाण्ड कर रहे हैं। सुबह नौ बजे से अरणिमंथन से अग्नि प्रकट हुई। उसके पूर्व गणपति आदि स्थापित देवताओं का पूजन किया गया। द्वारपालों द्वारा सभी शाखाओं का वेद पारायण, देव प्रबोधन, औषधिवास, केसराधिवास कराया गया। प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान में घृताधिवास, कुण्ड पूजन, पंचभूसंस्कार का भी विधिवत पूजा किया गया। नौ कुण्ड बनाये गये हैं और नौ ग्रहों की पूजा की गयी, जिसमें शांति हवन सम्पन्न हुआ। वेदी पांच फुट की बनायी गयी है जिसमें राम की महापूजा में भगवान को चावल में रखकर उनका धान्याधिवास किया गया।
उन्होंने बताया कि वाल्मीकी रामायण और रामचरित मानस के सुंदरकांड का पाठ, गणेश, विष्णु, शंकर भगवान का जाप लगातार किया गया। राजाराम-भद्र-श्रीरामयन्त्र, बीठ देवता, अंगदेवता, आवरण देवता, महापूजा, वारुण मण्डल, योगिनीमण्डल स्थापन, क्षेत्रपाल मण्डल स्थापन, ग्रह होम, स्थाप्य देवहहोम, प्रासाद वास्तु शांति, धान्याधिवास सायंकालिक पूजन एवं आरती होगी। वहां पर स्थापित सभी देवताओं की पूजा की गयी। रामलला के अचल विग्रह को अभी ढक कर रखा गया है। रामलला के अचल विग्रह गर्भगृह स्थल व यज्ञ मण्डप का पवित्र नदियों के जल से अभिषेक भी किया गया।
पंडित अरुण कुमार दीक्षित ने बताया कि आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित, अरुण दीक्षित, सुनील दीक्षित, अशोक वैदिक दीक्षित के अलावा देश के विभिन्न प्रांतों से जैसे महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु समेत देश के विभिन्न प्रांतो से पधारे 121 पंडितों ने सुबह अरणि मंथन से अग्नि प्रकट करायी। इसके पूर्व गणपति आदि स्थापित देवताओं का पूजन, द्वारपालों द्वारा सभी शाखाओं का वेद पारायण, देव प्रबोधन, औषधिवास, केसराधिवास, कुण्ड पूजन सम्पन्न हुआ। अरणि मंथन द्वारा प्रकट हुई अग्नि की कुंड में स्थापना, ग्रह स्थापना, असंख्यात रुद्रपीठस्थापन, प्रधान देवता स्थापन किया। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार राम मंदिर के गर्भगृह में आज रामलला के विग्रह को औषधिवास, केसराधिवास, घृताधिवास और सायंकाल धान्याधिवास का मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न कराया गया। इस अनुष्ठान में काशी के पं. गणेश शास्त्री, द्रविड़ एवं प्रमुख आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित शामिल हैं। अनुष्ठान में हनुमान चालीसा, बाल्मीकी रामायण के श्लोक, रामचरित मानस की चौपाईयां, सुंदरकांड, देवी देवताओं का आवाहन सहित प्रखर विद्वानों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा सम्पन्न करायी।