चुनाव प्रचार में भाजपा विपक्षी दलों से काफी आगे

चुनाव प्रचार में भाजपा विपक्षी दलों से काफी आगे

सहारनपुर, 4 अप्रैल : लोकसभा चुनाव के पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सत्तारुढ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रचार में बढ़त बना ली है वहीं विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने अभी तक मतदान वाले इलाकों की सुधि नहीं ली है।
      पहले चरण में 19 अप्रैल को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आठ सीटों के लिए मतदान होना है। जिसका प्रचार 17 अप्रैल रामनवमी के दिन बंद हो जाएगा। इस तरह से चुनाव प्रचार के लिए 12 दिन ही बचे हैं। भाजपा चुनाव प्रचार में अपने विपक्षी दलों पर एकतरफा बढ़त बनाए हुए हैं। पार्टी के शीर्ष प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तीन बड़ी चुनावी रैलियां करनी थीं। जिसका शुभारंभ वह 31 मार्च को मेरठ से कर चुके हैं। छह अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी सहारनपुर में दिल्ली रोड़ स्थित राधा स्वामी सेंटर पर जनसभा को संबोधित करेंगे। एसपीजी सहारनपुर में डेरा डाल चुकी है।
       जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सभास्थल का मुआयना कर चुके हैं। प्रधानमंत्री के साथ मंच पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी उपस्थित रहेंगे। इन तीनों मुख्यमंत्रियों के लिए भी अलग-अलग हेलीपैड तैयार कर लिए गए हैं।
     गौरतलब है कि सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र उत्तराखंड और हरियाणा दोनों राज्यों की सीमाओं को छूता है। सहारनपुर जिले में सैनी बिरादरी और उत्तराखंड़ियों की अच्छी-खासी तादाद है। प्रधानमंत्री अगली चुनावी सभा मुरादाबाद मंड़ल में प्रस्तावित है। भाजपा की ओर से गृहमंत्री अमित शाह ने एक दिन पूर्व मुजफ्फरनगर और मुरादाबाद में सभाएं की थीं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले और दूसरे चरण में होने वाले चुनाव क्षेत्रों में प्रबुद्ध वर्ग के सम्मेलन को संबोधित कर चुके हैं।
      उत्तर प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य भी पश्चिम के चुनाव क्षेत्रों का दौरा करके जा चुके हैं। सिंचाई मंत्री स्वतंत्र देव सिंह सहारनपुर में डेरा डाले हुए हैं। प्रदेश भाजपाध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भी पश्चिम के सभी जिलों में चुनाव मंथन कर चुके हैं।
     इस तरह से भाजपा ने अपने पक्ष में चुनावी माहौल को गरमा दिया है। कार्यकर्त्ताओ और मतदाताओं  को ज्यादा से ज्यादा मतदान के लिए प्रेरित करने का काम किया। जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सपा नेता अखिलेश यादव, बसपा प्रमुख मायावती अभी कहीं भी चुनाव प्रचार के नहीं निकल पाए हैं। 17 अप्रैल को पहले चरण वाले सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बागपत, बिजनौर, नगीना, मुरादाबाद, रामपुर और पीलीभीत में चुनाव प्रचार पांच बजे बंद हो जाएगा।
     जानकारी के मुताबिक सपा, बसपा, कांग्रेस नेता मुसलमानों का रमजान का पवित्र महीना चलने के कारण चुनाव प्रचार में नहीं कूदे हैं। 11 या 12 अप्रैल को ईद होने के बाद विपक्षी नेताओं के चुनाव प्रचार में कूदेंगे। पहले चरण में प्रचार के लिए उनके पास मुश्किल से पांच दिन बचेंगे। तब तक भाजपा अपना प्रचार अभियान पूरा कर चुकी होगी। इस चुनाव में रालोद का भाजपा के साथ गठबंधन है। रालोद के उम्मीदवार भले ही केवल दो सीटों बिजनौर और बागपत पर चुनाव मैदान में हो लेकिन जयंत चौधरी अपने प्रभाव वाली सभी सीटों पर प्रचार  के लिए जा रहे हैं। उन्होंने मेरठ में प्रधानमंत्री के साथ मंच साझा किया तो वह तीन अप्रैल को बुढ़ाना में गृहमंत्री अमित शाह के साथ उपस्थित रहे।
     जयंत चौधरी की मौजूदगी से भाजपा का जाटों में समर्थन बढ़ा दिखता है। अमित शाह अपने संबोधनों में राम मंदिर, जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने का उल्लेख कर रहे हैं तो जयंत चौधरी किसानों और मजदूरों को उनका हक दिलानें के लिए विश्वास दिला रहे हैं। जयंत चौधरी चुनावी सभाओं में चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जता रहे हैं। जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव के खिलाफ भी अपने तेवर कड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि वह पलटे नहीं हैं बल्कि उन्होंने अखिलेश यादव को सियासी पटखनी देने का काम किया है।
      पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा नेता भगवा  लहर बनाने और उसकी धारा तेज करने प्राणपन से जुटे हैं जबकि विपक्षी नेता अपने उम्मीदवारों को अदलने-बदलने में ही अपनी ऊर्जा खपा रहे हैं।
     देखने में यह आ रहा है कि सहारनपुर में कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद, कैराना में सपा उम्मीदवार इकरा हसन और मुजफ्फरनगर में सपा उम्मीदवार हरेंद्र मलिक, स्थानीय नेताओं के साथ मिलकर चुनाव अभियान चलाए हुए हैं। उनका मुख्य फोकस अपने कार्यकर्त्ताओं को संगठित और सक्रिय करने और मतदाताओं से घर-घर जाकर जनसंपर्क करने में लगा है। इस तरह से अब देखना यह है कि विपक्षी दल भाजपा से चुनाव प्रचार में पिछड़ने के बावजूद कम समय में कैसें अपने उम्मीदवारों की स्थिति सुदृढ़ कर पाते हैं।

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