
संयुक्त राष्ट्र, 24 अप्रैल । संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने बुधवार को गाजा पट्टी के नासिर और अल-शिफा अस्पताल नष्ट होने और ‘सामूहिक कब्रों’ की रिपोर्टों पर गहरी चिंता जतायी।
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी वोल्कर तुर्क ने इजरायल और हमास के बीच जारी संघर्ष के दौरान नासिर तथा अल-शिफा अस्पतालों के मरने वालों की निष्पक्ष जांच का आह्वान किया।
फिलिस्तीनी अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने नासिर में 283 शव निकाले हैं। इनमें से कुछ के हाथ बंधे हुए थे। यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी मृत्यु कैसे हुई या उन्हें कब दफनाया गया?
इजराइल की सेना ने कहा कि शवों को दफनाने का जो दावा किया है वह “निराधार” है। लेकिन इसमें यह जरूर कहा गया कि फरवरी में खान यूनिस शहर के अस्पताल में दो सप्ताह के ऑपरेशन के दौरान, सैनिकों ने फिलिस्तीनियों द्वारा दफनाए गए शवों की “उन जगहों पर जांच” की, जहां खुफिया जानकारी ने बंधकों की संभावित उपस्थिति का संकेत दिया था।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि वह वर्तमान में फिलिस्तीनी अधिकारियों की रिपोर्ट की पुष्टि पर काम कर रहा है कि नासिर अस्पताल के मैदान में 283 शव पाए गए हैं, जिनमें से 42 की पहचान की जा चुकी है।
श्री तुर्क ने कहा, ” इसमें अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं को शामिल किया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा, “अस्पताल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत विशेष सुरक्षा के हकदार हैं। नागरिकों, बंदियों और अन्य लोगों की जानबूझकर हत्या करना, जो युद्ध में भाग नहीं ले रहे हैं, एक युद्ध अपराध है।”
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि रिपोर्टें “अविश्वसनीय रूप से परेशान करने वाली” हैं।
हमास द्वारा संचालित नागरिक सुरक्षा बल के एक प्रवक्ता ने सोमवार को बीबीसी अरबी के गाजा टुडे कार्यक्रम को बताया कि उसे स्थानीय फिलिस्तीनियों से रिपोर्ट मिली है कि युद्ध के दौरान मारे गए लोगों की “बड़ी संख्या” के शवों को एक अस्थायी स्थान पर दफनाया गया था।
आईडीएफ ने कहा कि उसके बलों ने छापे के दौरान “लगभग 200 आतंकवादियों को हिरासत में लिया था जो अस्पताल में थे।” उन्होंने कहा कि उन्हें गोला-बारूद के साथ-साथ इजरायली बंधकों के लिए अप्रयुक्त दवाएं भी मिलीं।
आईडीएफ ने जोर देते हुये कहा कि उनके द्वारा छापेमारी अस्पताल, मरीजों और चिकित्सा कर्मचारियों को नुकसान पहुंचाए बिना की गई थीं।
इजरायली कब्जे के बाद नासेर में रहने वाले चिकित्सकों ने कहा कि वे मरीजों की देखभाल करने में असमर्थ थे और पानी, बिजली और अन्य आपूर्ति की कमी के कारण 13 लोगों की मौत हो गई।