विभाजन त्रासदी के लिए कांग्रेस जिम्मेदार: योगी

विभाजन त्रासदी के लिए कांग्रेस जिम्मेदार: योगी

लखनऊ, 14 अगस्त। देश के विभाजन के लिये कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने विदेशी हुकूमत को उखाड़ फेंकने के संकल्प के साथ आजादी की लड़ाई लड़ी थी और जब उसकी पूर्णता का समय आया तो इस सनातन राष्ट्र को विभाजन की त्रासदी का सामना करना पड़ा।
      विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुये श्री योगी ने कहा कि इतिहास केवल अध्ययन का विषय नहीं होता है, बल्कि वह गलतियों के परिमार्जन और गौरवशाली क्षणों से प्रेरणा ग्रहण करने का संकल्प होता है। आखिर क्या कारण था कि हजारों हजार वर्षों से सनातन राष्ट्र रहा भारत गुलाम हुआ। विदेशी आक्रांताओं ने यहां की परंपरा-संस्कृति को रौंदा और देश को गुलाम बनाया गया।
      उन्होने कहा कि जो किसी युग में नहीं हुआ, वह कांग्रेस की सत्ता के प्रति अभिलिप्सा ने विभाजन की त्रासदी के रूप में प्रस्तुत किया और स्वतंत्र भारत को ऐसा नासूर दे दिया, जिसका दंश आज भी भारत आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के रूप में झेल रहा है। यदि तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व ने दृढ़ता का परिचय दिया होता तो दुनिया की कोई ताकत इस अप्राकृतिक विभाजन को मूर्त रूप नहीं दे पाती। येन-केन प्रकारेण सत्ता प्राप्त करने के लिए कांग्रेस ने देश को दांव पर लगा दिया गया।
      योगी ने कहा कि 1947 और इसके बाद से यह लगातार हो रहा है। जब भी इनके हाथ में सत्ता में आई, इन लोगों ने देश की कीमत पर राजनीति की। इसकी कीमत जनता को लंबे समय तक चुकानी पड़ी है। विभाजन की दुर्भाग्यपूर्ण त्रासदी हम सबको उन्हीं गलतियों की परिमार्जन की तरफ ध्यान आकृष्ट करती है।
     मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत बल-बुद्धि, विद्या में दुनिया का नेतृत्व करने का सामर्थ्य रखता था। 16वीं सदी तक भारत का वैभव दुनिया में अग्रणी था। दुनिया की अर्थव्यवस्था के आधे भाग का नेतृत्व अकेले भारत करता था। यह तब था, जब देश कई सौ वर्षों तक लगातार विदेशी आक्रांताओं के आक्रमण को झेल रहा था। 14 अगस्त 1947 को देश के विभाजन की त्रासदी हो रही थी। 15अगस्त 1947 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा तिरंगा फहराकर कांग्रेस नेता आजादी का जश्न मना रहे थे, तब लाखों लोग अपनी मातृभूमि व परिवार को छोड़ने को मजबूर हो रहे थे। उस समय के अमानवीय अत्याचार किसी से छिपे नहीं हैं। दुनिया का सबसे समृद्धतम देश 1947 तक आते-आते दरिद्र देश में बदल गया था। हमारी कुछ कमजोरियों ने आक्रांताओं को देश के अंदर आक्रमण करने के लिए स्थान दिया।

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