
लखनऊ 23 सितम्बर । राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में शिक्षा की भूमिका को अहम बताते हुये उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार अपने कुल बजट का 15 फीसदी हिस्सा शिक्षा पर खर्च कर रही है।
सिटी मांटेसिरी स्कूल में देवी संस्थान द्वारा आयोजित 14वें एड लीडरशिप के उदघाटन समारोह को संबोधित करते हुये उन्होने कहा कि शिक्षा विकसित और विकासशील दोनों देशों की आधारशिला है। अकेले उत्तर प्रदेश में लगभग एक लाख 38 हजार राज्य प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें लगभग सात लाख शिक्षक दो करोड़ से अधिक बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। राज्य के कुल बजट का 15 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च होता है, इसलिए यह आकलन करना ज़रूरी है कि क्या हम सही परिणाम प्राप्त कर रहे हैं। क्या राज्य के प्राथमिक विद्यालयों के छात्र अन्य संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं। उन्होने कहा “ हमारे शैक्षिक प्रणाली में बदलाव की अत्यधिक आवश्यकता है। देवी संस्थान द्वारा प्रस्तुत अल्फा (एक्सीलरेटड लर्निंग फार आल) इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान देगी और यह पारंपरिक शिक्षा का पूरक तो हो सकती है, लेकिन उसका विकल्प नहीं।”
श्री सिंह ने कहा कि पहला ग्लोबल लर्निंग लैब एक ऐसा शिक्षण मॉडल प्रस्तुत कर रहा है, जिसमें अपने साथियों के साथ सक्रिय रूप से शिक्षण और अधिगम प्रक्रिया में शामिल होते हैं। यह नई पद्धति भारतीय कक्षाओं को सशक्त बनाने की उम्मीद है और छात्रों को उनके पाठ्यक्रम को आधे समय में पूरा करने में मदद करेगी, जिससे एफएलएन (बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता) में तेजी से प्रगति होगी। भारत को अगले तीन वर्षों में 11 लाख 16 हजार 846 नए शिक्षकों की आवश्यकता होगी, ताकि कमी को पूरा किया जा सके और नए छात्रों के नामांकन को संभाला जा सके। शिक्षा प्रणाली एक बड़े बदलाव की कगार पर है। यह बदलाव लाने का सबसे सही समय है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अल्फा के साथ शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव लाने के देवी संस्थान के प्रयासों की सराहना की।
यह तीन दिवसीय कार्यक्रम सिटी मोंटेसरी स्कूल, लखनऊ और डॉ. भारती गांधी के साथ-साथ डॉ. सुनीता गांधी द्वारा वर्ल्ड यूनिटी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षक प्रशिक्षण को बेहतर बनाना और अल्फा पद्धति के लिए सहयोग बढ़ाना है। उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, गोवा, मणिपुर, असम, ओडिशा, छत्तीसगढ़ जैसे 15 भारतीय राज्यों के शिक्षकों के साथ-साथ अमेरिका, मालदीव, केन्या, घाना, मलेशिया, पेरू और नेपाल जैसे सात देशों के अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक भी इस तीन दिवसीय सशक्तिकरण कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।