असम में गोमांस बिक्री पर प्रतिंबंध का शंकराचार्य ने किया स्वागत

असम में गोमांस बिक्री पर प्रतिंबंध का शंकराचार्य ने किया स्वागत

मथुरा, 9 दिसंबर। गोवर्धन पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने असम में सार्वजनिक स्थान पर गोमांस परोसने आदि पर  प्रतिबंध लगाने की मुख्यमंत्री की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि एक सच्चे सनातनी द्वारा लिया गया यह निर्णय है।
    आदि शंकराचार्य आश्रम गोवर्धन में सोमवार को पत्रकारों से कहा कि धर्मावलंबियों एवं साधू समाज की ओर से असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिश्व शर्मा का स्वागत करते हैं तथा इस सही निर्णय लेने के लिए उन्हे धन्यवाद भी देते हैं। नये नियम में असम में किसी होटल, रेस्ट्रां और यहां तक किसी सार्वजनिक या धार्मिक कार्यक्रम में गोमांस की बिक्री नही की जाएगी।
     जगद्गुरू ने कहा कि इसके पहले भी मुख्यमंत्री हिमंत बिश्व शर्मा ने किसी मंदिर या मठ से पांच किलोमीटर दायरे में गोमांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था तथा वर्षों से  देश के विभिन्न भागों  से गोवंश को एकत्रित करके बांगलादेश को होनेवाली गोतस्करी पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। नया आदेश असम में गोकशी रोकने में मील का पत्थर साबित होगा।
     शंकराचार्य ने  देश के विभिन्न भागों के मुख्यमंत्रियों से कहा है कि वे असम के मुख्यमंत्री द्वारा गोकशी रोकने की दिशा में उठाये गए इस कदम का अनुशरण करके अपने प्रांत में भी इसी प्रकार का शासनादेश दें इससे उन्हें न केवल देशवासियों का आशीर्वाद मिलेगा बल्कि गोमाता का भी आशीर्वाद मिलेगां क्योंकि हिन्दू सनातन धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार गऊ माता एक ऐसा मन्दिर है जिसके शरीर में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है।       उन्होंने कहा कि इससे देश में खुशहाली आएगी , धरती माता प्रसंन्न होंगी और जनजीवन में नवीनता आएगी। जिस देश में गऊ माता प्रसन्न हैं सुखी है वह देश स्वतः ही सुखी है। आदि काल से भारतवासियों की सुख समृद्धि की पूंजी गऊ माता की सेवा और उसका सुखी होना रहा है। हिमंत बिश्व शर्मा ने यह कदम उठाकर यह सिद्ध कर दिया है कि वे सच्चे धर्मानुयायी हैं, सच्चे भारत माता के सेवक है और ऐसे राजनीतिज्ञोें की देश को जरूरत है।
     शंकराचार्य ने कहा कि असम सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय असम मवेशी संरक्षण अधिनियम 2021 को और मजबूत करेगा। अभी तक के प्रतिबंधों में रांज्य में गोमांस का सेवन गैर कानूनी नही है लेकिन कानून में उन क्षेत्रों में मवेशी बध और गोमांस की बिक्री पर प्रतिबंध है जहां हिंदू, जैन और सिख बहुसंख्यक हैं और जो गोमांस नही खाते हैं। किसी मन्दिर या मठ के पांच किमी के दायरे में भी यह प्रतिबंध लागू है।कानून में मवेशी के एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने पर भी प्रतिबंध है।

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