
गोरखपुर 10 दिसंबर । प्रख्यात समाज सुधारक और नोबल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि करुणा का भूमंडलीकरण करना समय की मांग है। करुणा को सिर्फ दया या परोपकार की तरह नहीं लिया जा सकता, यह सामान्य मानवीय गुण नहीं बल्कि दैवीय शक्ति है।
श्री सत्यार्थी ने मंगलवार को यहां महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 92वें संस्थापक सप्ताह समारोह के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा “ हमें जीवन में चेतना और प्रज्ञा की यात्रा में करुणा के महत्व को समझना होगा। चेतना बुद्धि का विकास करती है तो इस चेतना को प्रज्ञा तक जाने के लिए करुणा का होना अपरिहार्य है। करुणा का अर्थ दूसरों की तकलीफ को अपनी तकलीफ की तरह महसूस करना और उसे दूर करने के लिए पूरी सामर्थ्य से जुट जाना है। उन्हें खुशी है कि आज वह करुणामय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हैं। ”
उन्होंने कहा “ योगी जी मानवता के उद्धार का कार्य पूरी तन्मयता से कर रहे हैं। हर नागरिक का भी यही सपना होना चाहिए।” श्री सत्यार्थी ने कहा कि आज दुनिया जितनी विभाजित और विखंडित है, उतनी कभी नहीं थी। दो अरब लोग युद्धों में या हिंसा के प्रभाव में जी रहे हैं। 46 करोड़ बच्चे युद्धों के शिकार हैं। पूरी दुनिया में जो समाधानकर्ता हैं उनका संबंध पीड़ितों से टूटता गया और दोनों के बीच खाई बढ़ती गई। इस खाई को भरने के लिए नैतिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी को एहसास करना होगा।
समाज सुधारक ने कहा कि दुनिया आज जितनी अमीर और कनेक्टेड है, उतनी कभी नहीं थी। आज हर सप्ताह दो बिलेनियर पैदा होते हैं। यदि हम युद्धों के एक सप्ताह के पैसे दे दें तो पूरी दुनिया के बच्चों को शिक्षा दी जा सकती है। युद्धों के दस दिन के पैसे दे दें तो दुनिया के हर गरीब बच्चे और महिलाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था की जा सकती है।
श्री सत्यार्थी ने एक संस्मरण सुनाते हुए कहा कि करीब 25 वर्ष पूर्व गोरखनाथ के आस पास नेपाल के बच्चों से दुकानों पर काम कराने की जानकारी होने पर वह दिल्ली में युवा सांसद योगी आदित्यनाथ से मिलने उनके दिल्ली के फ्लैट पर गए थे। उनके फ्लैट पर साधारण तख्त और कुर्सियां थीं। चुम्बकीय आकर्षण वाली मुस्कुराहट के साथ योगी को जैसे ही उन्होंने बाल श्रम के बारे में बताया उन्होंने फौरन फोन मिलाकर इस समस्या को समाप्त करने का आदेश दिया।