
लखनऊ 02 जनवरी : उत्तर प्रदेश के कबीना मंत्री आशीष पटेल और उनकी पत्नी एवं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने परोक्ष रुप से योगी सरकार पर हमला करते हुये कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई में अपना दल (एस) किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।
नये साल में पार्टी की पहली बैठक में अपने संबोधन के दौरान श्री पटेल ने अपनी ही सरकार पर हमलावर दिखे। उन्होने इशारों में कहा कि पिछले दिनों विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान उनके खिलाफ धरने पर बैठी सिराथू विधायक पल्लवी पटेल के पीछे कुछ वरिष्ठ राजनेता और अधिकारी थे। एसटीएफ के एक अधिकारी ने तो बाकायदा दाे लोगों को पल्लवी पटेल के साथ बैठाया और सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री आधी रात में धरना खत्म करने के लिये पल्लवी को मनाते दिखे।
उन्होने हालांकि किसी भी नेता अथवा अधिकारी के नाम का खुलासा नहीं किया मगर उनका इशारा साफ तौर पर अपनी ही सरकार पर था। उन्होने कहा कि उन्हे एसटीएफ अथवा किसी भी एजेंसी से सुरक्षा की जरुरत नहीं है। उनकी सुरक्षा के लिये पार्टी कार्यकर्ता ही काफी हैं।
बाद में पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने गुरुवार को कहा कि अपना दल (एस) सामाजिक न्याय की लड़ाई से पीछे नहीं हटेगा और यदि पार्टी के किसी भी कार्यकर्ता अथवा नेता की प्रतिष्ठा पर आंच आएगी तो पूरी पार्टी उसका डट कर मुकाबला करेगी। उन्होने कहा कि उन्हे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है और अपना दल (एस) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा बना रहेगा।
उन्होने कहा कि श्री पटेल ने अपना दर्द आज कार्यकर्ताओं के बीच साझा किया है और पूरी पार्टी उनके साथ है। पत्रकारों के बार बार कुरेदने पर भी न तो अनुप्रिया ने और न ही आशीष पटेल ने किसी भी राजनेता अथवा अधिकारी विशेष का नाम नहीं लिया।
आशीष पटेल ने कहा कि पल्लवी पटेल के उन पर लगाये गये आरोप निराधार हैं और वह इसके लिये पहले भी किसी भी तरह की जांच की सहमति दे चुके हैं। दरअसल, कुछ लोगों की मंशा पार्टी को डर दिखा कर सामाजिक न्याय की लड़ाई को कमजोर करना है मगर वह न तो डरेंगे बल्कि पिछड़े वर्ग के लिये उनकी लड़ाई और मजबूत होगी।
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि अपना दल के खिलाफ जो षडयंत्र चल रहे हैं वो कहां, किसके इशारे पर चल रहे हैं हमारा एक एक कार्यकर्ता जानता है।
गौरतलब है कि सिराथू से समाजवादी पार्टी विधायक और अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने प्राविधिक शिक्षा विभाग में विभागाध्यक्ष के पदों पर हुई नियुक्तियों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। उनका आरोप था कि पुरानी सेवा नियमावली के आधार पर नियुक्तियां कर अनियमितता की गई है।