
सहारनपुर/देवबंद, 24 मई। देवबंदी विचारधारा के मुस्लिमों के सबसे सम्मानित आलिम और दारूल उलूम देवबंद के प्राचार्य और मुसलमानों के सबसे बड़े सामाजिक और धार्मिक संगठन जमीयत उलमाए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरशद मदनी को इस बात पर गहरा रंज है कि आखिर क्यों केंद्र सरकार हिंदू धर्मावलंबियों के मां समान गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित नहीं कर रही है और क्यों गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का कानून बनाने को सामने नहीं आ रही है।
86 वर्षीय मौलाना अरशद मदनी जो प्रख्यात स्वतंत्रता सैनानी हुसैन अहमद मदनी के बेटे और तीन बार राज्यसभा सदस्य रहे दिवंगत असद मदनी के छोटे भाई हैं ने आज कहा कि जमीयत का हमेशा से यह किरदार और नीति रही है कि देश में सौहार्द्र और आपसी भाईचारा मजबूत रहे। देश की एकता और अखंडता हमेशा कायम रहे।
ध्यान रहे जमीयत उलमाए हिंद और देवबंद ने 1947 में देश बंटवारे और मुस्लिम लीग का खुलकर विरोध किया था। आज भी वह अपने उस स्टैंड पर कायम हैं। मौलाना अरशद मदनी रविवार सुबह देवबंद में अपने आवास पर इस संवाददाता से खास बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कई सवालों के बड़ी बेबाकी से जवाब दिए। बातचीत के दौरान मौलान अरशद मदनी के मोबाइल की लगातार घंटी बजती रही। देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों से भी उनके बयान के समर्थन में लोग बातें कर रहे थे।
मणिपुर के मौलाना बसीर अहमद ने कहा कि पूरे मणिपुर में मुसलमान किसी भी कीमत पर बकरा ईद पर गाय की कुर्बानी नहीं करेगा। उनके बयान को पूरे प्रदेश में फैलाया जा रहा है। इसी तरह के फोन काल बंगाल, कनाड़ा, इंग्लैंड, दिल्ली और गुजरात एवं मुंबई से भी आई।
उन्होंने कहा कि जमीयत हमेशा से इंसानियत के पैगाम को देने का काम कर रही है। इस संवाददाता ने मौलाना मदनी से पूछा कि कांग्रेस हुकूमतों के दौरान बड़ी संख्या में दंगे फसाद हुए जिसमें जानमाल की भारी क्षति हुई। लेकिन नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में कहीं भी दंगे फसाद की घटनाएं नहीं हुईं तो मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि यह बात सही है लेकिन कांग्रेस हुकूमत में कभी भी इस्लाम धर्म और उसके मदरसों को मिटाने का काम नहीं हुआ। आज देश बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है।
पश्चिमी बंगाल के मुस्लिम बाहुल्य मुर्शिदाबाद में टीएमसी से अलग होकर निर्दलीय दो सीटों से विधायक चुने गए हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद बनाने के प्रयासों पर पूछे गए सवाल पर मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि अब बाबरी मस्जिद कहीं नहीं बनेगी। संघ प्रमुख डा. मोहन भागवत से आपकी अगली मुलाकात अब कब होगी संबंधित सवाल पर उन्होंने कहा कि 10 अगस्त 2019 की रात करीब दो घंटे नई दिल्ली के संघ कार्यालय केशवकुंज में मिले थे और देश के हालात, सौहार्द्र और आपसी भाईचारे जैसे मुद्दों पर उनकी बातचीत हुई थी। डा. मोहन भागवत ने उनसे कहा था कि वह दोनों के बीच हुई बातचीत के मुद्दों पर संघ में विचार मंथन करेंगे और उनको मुलाकात के लिए फिर से बुलाएंगे। लेकिन शायद डा. भागवत उन्हें भुलाना भूल गए हैं या उनके विचार बदल गए हैं।
संवाददाता ने मौलाना मदनी को याद दिलाया कि डा. भागवत हाल ही के दिनों में अपने कई सार्वजनिक भाषणों में आपका यानि अरशद मदनी का बहुत सम्मान के साथ उल्लेख करते हैं। यानि वे आपको नहीं भूले हैं। इस पर मदनी साहब का कहना था कि उन्हें डा. मोहन भागवत से मिलने में कोई गुरेज नहीं है।
ध्यान रहे कि जमीयत के नेताओं से संघ प्रमुख की यह पहली अधिकृत मुलाकात थी। इससे पहले दिवंगत जमीयत अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की एक बार दिल्ली के इंडिया हैवीटेट सेंटर में अनौपचारिक मुलाकात हुई थी। ध्यान रहे मौलाना अरशद मदनी ने उस वक्त अफगानिस्तान की तालिबान सरकार का समर्थन किया था। जब अमेरिका अफगानिस्तान छोड़कर भागा था। अभी कुछ समय पहले अफगानिस्तान के विदेश मंत्री दारूल उलूम देवबंद आए थे। उन्होंने भारत के साथ बेहतर संबंधों की वकालत की थी। यानि कूटनीतिक लिहाज से जमीयत का विशेष महत्व है। मौलाना अरशद मदनी उस वक्त अफगानिस्तान की तालिबान की सरकार का समर्थन करने वाले पहले मुखर व्यक्ति थे। उनके इस स्टैंड का भारत को आज कूटनीतिक लाभ मिलता साफ दिख रहा है।