
लखनऊ, 14 जून । उत्तर प्रदेश के विकास की नई पहचान बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सोमवार को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक अध्याय जुड़ने जा रहा है। जेवर क्षेत्र के किसान और खेतिहर मजदूर उसी भूमि से पहली बार हवाई यात्रा करेंगे, जहां कभी वे खेती और श्रम किया करते थे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पहली उड़ान से लगभग 170 किसान, जिनमें 20 महिलाएं भी शामिल हैं, लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अभिनंदन करेंगे।
विकास के सहभागी किसान करेंगे मुख्यमंत्री से मुलाकात
पहली उड़ान में शामिल होने वाले किसान परिवार वे हैं, जिन्होंने प्रदेश और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए एयरपोर्ट निर्माण के लिए अपनी भूमि उपलब्ध कराई थी। वर्षों तक खेतों में मेहनत करने वाले इन किसानों के लिए यह यात्रा केवल हवाई सफर नहीं, बल्कि सम्मान, विश्वास और विकास में उनकी सहभागिता का प्रतीक मानी जा रही है।
लखनऊ पहुंचने पर किसान प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेगा तथा प्रदेश में हुए विकास कार्यों और बदलते सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करेगा।
महिला किसानों की भागीदारी से और खास बनेगा अवसर
इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल 20 महिला किसानों की मौजूदगी इस यात्रा को विशेष महत्व प्रदान कर रही है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर पहली बार विमान यात्रा करने जा रही ये महिलाएं प्रदेश में महिला सशक्तीकरण और विकास प्रक्रिया में उनकी बढ़ती भागीदारी की प्रतीक बनेंगी। यह पहल इस संदेश को भी मजबूती देगी कि विकास की मुख्यधारा में समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
किसानों के आत्मसम्मान का उत्सव : धीरेन्द्र सिंह
जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने कहा कि यह अवसर केवल गौतमबुद्ध नगर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकास और संवेदनशीलता का ऐसा मॉडल प्रस्तुत कर रहा है, जिसमें किसान केवल योजनाओं के लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास के सम्मानित साझीदार हैं।
उन्होंने कहा, “जिन पैरों में कभी खेतों की मिट्टी लगी रहती थी, आज वही विमान की सीढ़ियां चढ़ेंगे। यह किसानों के आत्मसम्मान का उत्सव है और उस विश्वास का परिणाम है, जिसने उत्तर प्रदेश की तस्वीर और तकदीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”
उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल एक आधारभूत संरचना परियोजना नहीं, बल्कि विकसित भारत के सपनों को साकार करने वाली एक जीवंत तस्वीर है, जिसमें किसान, मजदूर और आम नागरिक विकास यात्रा के सक्रिय सहभागी बनकर उभरे हैं