
कानपुर, 10 जुलाई । कानपुर नगर की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ‘साइ-वज्र कार्ययोजना’ अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए कॉरपोरेट और फर्मों के बैंक खातों का दुरुपयोग कर देशभर में साइबर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है।इस कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जालौन निवासी मंगल सिंह (36), मैनपुरी निवासी बिजेंद्र यादव (36), बांदा निवासी अबी वकाश (21) और इटावा निवासी राहुल शर्मा (22) के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन, छह चेकबुक, चार पासबुक, चार एटीएम कार्ड, एक टैक्स इनवॉइस बुक, नौ लेटरहेड, एक फर्म की मोहर तथा एक वैगनआर कार बरामद की है।
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी एक संगठित साइबर गिरोह के सदस्य हैं, जो बड़ी लिमिट वाले फर्मों और कॉरपोरेट बैंक खातों को अपने कब्जे में लेकर साइबर अपराध को अंजाम देते थे। गिरोह खाताधारकों को लोन दिलाने, व्यापारिक सहायता और अन्य बहानों से विश्वास में लेकर उनके बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबर, सिम कार्ड और आवश्यक दस्तावेज हासिल कर लेता था। इसके बाद एपीके फाइल और अन्य तकनीकी माध्यमों से बैंक खातों का एक्सेस गिरोह के अन्य सदस्यों को उपलब्ध कराया जाता था, जिनके जरिए साइबर ठगी की रकम विभिन्न खातों में स्थानांतरित की जाती थी।डिजिटल जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से बड़ी मात्रा में बैंक खातों का विवरण, आधार और पैन कार्ड, चेकबुक, पासबुक, क्यूआर कोड, लॉगिन आईडी, पासवर्ड, एपीके लिंक, वेंडर पेमेंट वीडियो, वॉयस रिकॉर्डिंग और साइबर अपराध से संबंधित व्हाट्सएप चैट बरामद हुई हैं, जिससे गिरोह की संगठित आपराधिक गतिविधियों की पुष्टि हुई है। जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह के सदस्य उत्तर प्रदेश के अलावा पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में सक्रिय अपने सहयोगियों के माध्यम से साइबर ठगी के धन का लेन-देन करते थे।
इस संबंध में थाना साइबर क्राइम, कमिश्नरेट कानपुर नगर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 61(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जा रहा है तथा गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।कानपुर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते, सिम कार्ड, ओटीपी, इंटरनेट बैंकिंग अथवा अन्य वित्तीय जानकारी साझा न करें। किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।