
लखनऊ, 21 जुलाई । उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने मंगलवार को मेरठ स्थित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय का निरीक्षण करते हुए कहा कि यह संस्थान खेल शिक्षा, खेल विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने की क्षमता रखता है। उन्होंने विश्वविद्यालय के समग्र, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध विकास के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में विकसित की जा रही शैक्षणिक, आवासीय तथा खेल अवसंरचना का निरीक्षण किया और प्रशासनिक भवन में कुलपति मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) दीप अहलावत द्वारा प्रस्तुत विश्वविद्यालय की प्रगति एवं भावी विकास योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण देखा।
प्रस्तुतीकरण में विश्वविद्यालय की स्थापना के उद्देश्य, शैक्षणिक गतिविधियों, निर्माण कार्यों की प्रगति, खेल अवसंरचना, प्रस्तावित पाठ्यक्रमों, खेल विज्ञान एवं अनुसंधान सुविधाओं तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग की जानकारी दी गई। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य उत्कृष्ट खिलाड़ियों के निर्माण के साथ-साथ खेल विज्ञान, खेल चिकित्सा, खेल प्रबंधन, खेल प्रौद्योगिकी, उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में राष्ट्रीय उत्कृष्टता का केंद्र बनना है।समीक्षा के दौरान राज्यपाल ने कहा कि खेल शिक्षा के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और अनुसंधान का समन्वय विश्वविद्यालय की विशिष्ट पहचान होना चाहिए। उन्होंने आधुनिक शिक्षण संसाधनों, स्मार्ट क्लासरूम और प्रयोगात्मक शिक्षण व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। साथ ही विद्यार्थियों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच नियमित संवाद और बेहतर समन्वय पर बल दिया।
स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण करते हुए उन्होंने खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स मेडिसिन, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास तथा आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को चिकित्सा और वैज्ञानिक सहयोग एक ही परिसर में उपलब्ध कराया जाना चाहिए।राज्यपाल ने कॉमन मेस की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए खिलाड़ियों को स्वच्छ, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन के लिए संतुलित पोषण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बालक एवं बालिका छात्रावासों में स्वच्छता, पेयजल, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था, अध्ययन एवं मनोरंजन संबंधी सुविधाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। बालिका छात्रावास के निरीक्षण के दौरान उन्होंने छात्राओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करने पर बल दिया तथा लॉन्ड्री को छात्रावास के कमरों के बजाय बाहरी आवृत क्षेत्र में विकसित करने का सुझाव दिया।
पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग, सोलर पैनलों की स्थापना तथा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत व्यापक वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल संरक्षण, अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग, ऊर्जा दक्षता और स्वच्छता को विश्वविद्यालय की संस्थागत संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाने पर बल दिया।उन्होंने प्रदेश के विद्यालयों में खेल प्रतिभा पहचान कार्यक्रम संचालित कर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की प्रतिभाओं को विश्वविद्यालय से जोड़ने की आवश्यकता बताई। साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाकर विश्वविद्यालय को खेल शिक्षा और खेल विज्ञान के वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।
प्रशासनिक भवन का निरीक्षण करते हुए राज्यपाल ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, दक्षता और डिजिटल प्रणाली को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों को सभी सेवाएं सरल, सुगम और समयबद्ध ढंग से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय आने वाले समय में देश के अग्रणी खेल विश्वविद्यालयों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा और उत्तर प्रदेश को खेल उत्कृष्टता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कुलपति मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) दीप अहलावत ने कहा कि राज्यपाल का निरीक्षण विश्वविद्यालय के विकास के लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा है। उनके मार्गदर्शन से विश्वविद्यालय की भावी कार्ययोजना को नई दिशा और गति मिलेगी तथा इसे विश्वस्तरीय खेल शिक्षा, खेल विज्ञान, अनुसंधान और आधुनिक खेल अवसंरचना के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित करने में सहायता मिलेगी।निरीक्षण के दौरान राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी अशोक देसाई, कुलसचिव सुनील कुमार झा सहित विश्वविद्यालय एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।