
लखनऊ, 06 सितंबर । उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय ने गुजरात से पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मिले करोड़ों रुपये के संदिग्ध चंदे के स्रोत और अंतिम लाभार्थियों की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में आयकर विभाग के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के निदेशक राहुल नवीन को पत्र भेजकर जांच की मांग की।श्री अजय राय ने पत्र में बीबीसी हिंदी की पत्रकार शुभांगी मिश्रा की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि गुजरात से जुड़े छह गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 1,700 करोड़ रुपये का चंदा मिलने की बात सामने आई है।
पत्र के अनुसार, लोकसभा चुनाव में इन दलों द्वारा उत्तर प्रदेश में केवल 15 उम्मीदवार उतारे गए थे।कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पड़ताल के मुताबिक आम जनमत पार्टी को करीब 620 करोड़ रुपये, सर्वदलीय रक्षक पार्टी को 330 करोड़ रुपये, स्वतंत्र अभिव्यक्ति पार्टी को 219 करोड़ रुपये, न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी को 200 करोड़ रुपये, गरीब कल्याण पार्टी को 138 करोड़ रुपये और भारतीय नेशनल जनता दल को करीब 191 करोड़ रुपये मिले हैं।
उन्होंने कहा कि यह तथ्य गंभीर है और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की पूर्व कार्रवाई में कुछ गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के माध्यम से संदिग्ध धन के आदान-प्रदान की जानकारी सामने आने का भी दावा किया गया है। ऐसे में इन छह दलों को मिले धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थियों की जांच आवश्यक है।श्री राय ने धन के वास्तविक स्रोत, मूल दाता, दलों के वास्तविक नियंत्रक या लाभकारी स्वामियों, विभिन्न दलों के बीच किसी साझा तंत्र अथवा फंड प्रवाह, बैंक खातों के माध्यम से धन की परत-दर-परत आवाजाही तथा नकद, हवाला या सीमा पार लेनदेन से संभावित संबंधों की जांच की मांग की।
उन्होंने आयकर विभाग के साथ सूचनाओं का समन्वय कर बैंक खातों, कर विवरणियों, लेखा-परीक्षा रिपोर्ट, चंदे की रिपोर्ट और संदिग्ध लेनदेन की धन-श्रृंखला स्थापित करने का आग्रह किया।उन्होंने कहा कि यदि जांच में अनुसूचित अपराध और उससे उत्पन्न अपराध की आय के पर्याप्त आधार सामने आते हैं तो धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
श्री अजय राय ने आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दलों के पंजीकरण और वित्तीय अनुपालन की निगरानी की भी मांग की।उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के साथ जांच से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की जानी चाहिए, ताकि जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत ऐसे दलों के पंजीकरण और वित्तीय अनुपालन पर आवश्यक निगरानी रखी जा सके