प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर मंतर पर जश्न, राहुल समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने दी प्रतिक्रिया

प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर मंतर पर जश्न, राहुल समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने दी प्रतिक्रिया

नयी दिल्ली, 25 जुलाई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा फैलते ही राजधानी के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध-प्रदर्शन जश्न में बदल गया। विपक्षी दलों के नेताओं ने भी पेपर लीक मामले पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवा शक्ति की जीत बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को अब युवा पीढ़ी से माफी मांगनी चाहिए।हाथों में तिरंगा लिए प्रदर्शनकारियों और छात्रों ने ‘हार गये, हार गये, तानाशाह हार गये’ के नारे लगाये और देशभक्ति के गीतों के बीच अपनी जीत का एलान किया।

श्री प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे भारत के छात्रों की आवाज और लाखों युवाओं की जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि यह सच की जीत और श्री मोदी की जिद की हार है। श्री खरगे ने मांग की कि अब प्रधानमंत्री को युवा पीढ़ी से माफी मांगनी चाहिए और छात्रों पर लाठियां और पैलेट गन चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने श्री प्रधान के इस्तीफे को शिक्षा व्यवस्था को संवारने की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि युवाओं का सड़कों पर डटकर खड़े होना ही असली साहस है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के माफी मांगने और हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इसे छात्रों के संघर्ष की जीत बताते हुए कहा कि जब युवा एकजुट होते हैं, तो उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता और शिक्षा सुधार की यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।इसी क्रम में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देशवासियों और छात्रों को बधाई देते हुए इसे ‘जेन-जी’ के संघर्ष की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि आखिरकार सरकार को जनता के आगे झुकना ही पड़ा। वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक फैले युवाओं के आंदोलन ने दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी को झुकने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को इससे सीख लेने की सलाह दी, ताकि भविष्य में फिर कभी पेपर लीक न हो।

दूसरी ओर, आंदोलनकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपने रुख को स्पष्ट किया है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे सीधे सड़कों से मिली लोकतंत्र, धैर्य और शांति की जीत बताया और कहा कि अब पूरा ध्यान शिक्षा प्रणाली में ठोस सुधार लाने पर होना चाहिए।सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे आंदोलन का पहला पड़ाव बताते हुए एलान किया कि जब तक पीड़ित परिवारों को मुआवजा और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई जैसी अन्य प्रमुख मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहेगा।

तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष और कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी कहा कि सरकार भारी राजनीतिक दबाव के कारण यह कदम उठाने पर मजबूर हुई है और यदि यह फैसला समय रहते लिया जाता तो लाठीचार्ज जैसी अनहोनी टल सकती थी।बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने कहा, ये इस्तीफा छात्रों के आंदोलन की वजह से हुआ है, अगर ये पहले हो जाता तो बेहतर था। वहीं राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि झूठ, पैतरेंबाजी और अहंकार की हार हुई है।

बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कहा कि वह इस जीत के लिए भारत के युवाओं, खासकर ‘जेन ज़ी’ को बधाई देते हैं। जवाबदेही और जनमत के प्रति संवेदनशीलता एक मजबूत लोकतंत्र के अहम मूल्य हैं। कोई भी जनता की इच्छा से ऊपर नहीं है। हमारे लोगों, खासकर युवाओं की आवाज सुनी जानी चाहिए। भारत का भविष्य युवाओं का है। मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि जंतर-मंतर पर लगातार 28 दिनों तक जिन युवाओं ने संघर्ष दिखाया, यह उन्हीं ‘युवा शक्ति’ और लोकतंत्र की बड़ी जीत है। सरकार को आखिरकार नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी पड़ी।

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