
वाराणसी, 27 जुलाई। ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज इस वर्ष चातुर्मास व्रत एवं अनुष्ठान छत्तीसगढ़ में संपन्न करेंगे। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उनके काशी में उपस्थित नहीं रहने के कारण भक्तों ने पूर्व अनुमति लेकर सोमवार को शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में उनके चरण पादुका का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजन किया।इस अवसर पर भक्तों ने गौमाता की रक्षा के लिए विभिन्न कष्ट सहकर 81 दिवसीय ‘गविष्ठी यात्रा’ पूर्ण करने पर शंकराचार्य महाराज का अभिनंदन एवं वंदन भी किया। शंकराचार्य महाराज ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर काशीवासियों और सभी श्रद्धालुओं से गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सनातनी के लिए गौमाता आराध्य हैं और उन्हें 33 कोटि देवी-देवताओं का आश्रयस्थल माना गया है। गौमाता की पूजा से समस्त देवी-देवताओं के पूजन का फल प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में घर की पहली रोटी सबसे पहले गौमाता के लिए निकाली जाती है, जिससे उनके महत्व का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
शंकराचार्य महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि इस वर्ष उनका चातुर्मास व्रत छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में संपन्न होगा। यहां विश्व के सबसे बड़े सवा लाख शिवलिंगों वाले शिव मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। चातुर्मास के दौरान विभिन्न आध्यात्मिक एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा।उन्होंने बताया कि इसी अवधि में उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी। इसमें शंकराचार्य महाराज अपने प्रतिनिधियों को गौरक्षा आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने तथा गौरक्षा संबंधी अपने विचारों एवं नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित करेंगे। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य महाराज मंगलवार, 28 जुलाई को काशी से छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे।