गुरु पूर्णिमा पर गुरु और शिष्य की दोहरी भूमिका में दिखेंगे योगी

गुरु पूर्णिमा पर गुरु और शिष्य की दोहरी भूमिका में दिखेंगे योगी

गोरखपुर, 27 जुलाई । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार शिष्य और गुरु दोनों भूमिकाओं का निर्वहन करेंगे। वह एक ओर अपने ब्रह्मलीन गुरुजनों का पूजन एवं वंदन करेंगे, वहीं दूसरी ओर गोरक्षपीठ के साधु-संतों, शिष्यों और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करेंगे। गुरु पूर्णिमा का पर्व गोरक्षपीठ के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर गोरक्षपीठाधीश्वर महायोगी गुरु गोरखनाथ सहित पीठ के पूर्ववर्ती गुरुजनों की पूजा-अर्चना करते हैं और परंपरा के अनुसार अपने शिष्यों को आशीर्वाद देते हैं। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 29 जुलाई को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव में शामिल होंगे।नाथपंथ में गुरु और ईश्वर को अभिन्न माना गया है। इसी कारण गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा का आयोजन विशेष श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान के साथ किया जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रातःकाल महायोगी गुरु गोरखनाथ का विशेष पूजन करेंगे तथा परंपरा के अनुसार उन्हें रोट अर्पित करेंगे। इसके बाद मंदिर परिसर स्थित देवी-देवताओं के विग्रहों और नाथपंथ के गुरुजनों की समाधियों पर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी, जिसका समापन सामूहिक आरती से होगा।

आनुष्ठानिक कार्यक्रमों के उपरांत गोरक्षपीठाधीश्वर अपने शिष्यों एवं श्रद्धालुओं के बीच पहुंचेंगे। शिष्य तिलक लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। इसके बाद आशीर्वचन तथा सहभोज (भंडारा) का आयोजन होगा। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 23 जुलाई से गोरखनाथ मंदिर में चल रही सप्तदिवसीय श्रीरामकथा की पूर्णाहुति भी संपन्न होगी।गोरक्षपीठ में गुरु-शिष्य परंपरा को नाथपंथ की मूल आधारशिला माना जाता है। महायोगी गुरु गोरखनाथ से प्रारंभ हुई यह परंपरा ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज, ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज से होते हुए वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ तक निरंतर आगे बढ़ी है।

गोरक्षपीठ की गुरु परंपरा केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोककल्याण के विविध क्षेत्रों में भी इसका विस्तार हुआ। महंत दिग्विजयनाथ महाराज ने वर्ष 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की। उनके उत्तराधिकारी महंत अवेद्यनाथ महाराज ने शिक्षा, चिकित्सा और योग सेवा के प्रकल्पों का विस्तार किया। वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने इन लोककल्याणकारी कार्यों को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, योग और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में गोरक्षपीठ की गतिविधियों का व्यापक विस्तार किया है।

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