धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान की आड़ में चल रही ‘गुप्त साजिशों’ का पर्दाफाश जरूरी: अखिलेश

धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान की आड़ में चल रही ‘गुप्त साजिशों’ का पर्दाफाश जरूरी: अखिलेश

लखनऊ, 8 अगस्त। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान की आड़ में अपनी गतिविधियां चलाने वाला एक ‘पिछड़ा हुआ गुप्त समूह’ अब अपने नापाक खेल नहीं खेल सकता। उसके निरंकुश चरित्र और गुप्त चालों को देश के सामने उजागर करना जरूरी है।श्री यादव ने कहा कि ऐसे तत्वों के छिपे हुए उद्देश्यों, राजनीतिक शब्दजाल, छल-कपट और उन साजिशों को सामने लाना होगा, जो देश की सदियों पुरानी करुणा, प्रेम, सहिष्णुता और सह-अस्तित्व की समरस विरासत के लिए खतरा हैं। उन्होंने कहा कि आने वाली नई प्रगतिशील और सकारात्मक पीढ़ी नकारात्मकता को स्वीकार नहीं करेगी, क्योंकि यह उसके भविष्य और स्वतंत्रता का सवाल है। यह पीढ़ी अपने भविष्य का निर्माण विवेकपूर्ण, वैज्ञानिक, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक तरीके से करेगी।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि कोई भी इस पीढ़ी को नियंत्रित नहीं कर सकता, उसकी आवाज को दबा नहीं सकता और उसकी सीमाएं तय नहीं कर सकता। युवा अपने संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों की सीमाओं को समझते हैं तथा अपनी राह और अपना आसमान स्वयं तय करना जानते हैं।उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को किसी तय सांचे में ढालना संभव नहीं होगा। वह स्वयं अपने विचारों और मूल्यों का सांचा तैयार करेगी, जिसकी दृष्टि वैश्विक भाईचारे, सम्मानजनक जीवन, सुखी और स्वस्थ वातावरण तथा बिना किसी भेदभाव के समानता और समान अवसर पर आधारित होगी।

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