सोनिया गांधी कैसे मतदाता बनीं – इसका भी जवाब दे कांग्रेस : भाजपा

सोनिया गांधी कैसे मतदाता बनीं – इसका भी जवाब दे कांग्रेस : भाजपा

नयी दिल्ली, 22 सितंबर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी का नाम देश में कथित रूप से गलत तरीकों से मतदाता सूची में दर्ज किये जाने को लेकर चल रहे कानूनी विवाद पर मंगलवार को विपक्षी पार्टी से सवाल किया कि क्या उसने और गांधी परिवार ने इसके लिए जाली दस्तावेज बनवाये थे।भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने पार्टी मुख्यालय पर एक संवाददाता सम्मेलन में इस मुद्दे को ‘ लोकतंत्र की चोरी ‘ करार देते हुए पर कांग्रेस, श्रीमती गांधी और लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर हमला बोला। उल्लेखनीय है कि दिल्ली की सत्र अदालत ने इस मामले में एक मजिस्ट्रेटी अदालत के पिछले आदेश को खारिज कर दिया है और नये सिरे से इस मामले की जांच के निर्देश दिये हैं।

उल्लेखनीय है कि विपक्ष के नेता श्री गाँधी मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा (एसआईआर) को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर कुछ समय से लगातार ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते आ रहे हैं।भाजपा प्रवक्ता ने आज इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि श्रीमती गांधी भारतीय नागरिक बनने से तीन साल पहले ही जाली दस्तावेज के जरिये 1980 में मतदाता बन गयी थीं। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यह न केवल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 और ‘ जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम ‘ का खुला उल्लंघन है, बल्कि ‘ भारतीय न्याय संहिता ‘ के तहत एक गंभीर अपराध भी है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि भारत में वोट देने के अधिकार के लिए भारतीय नागरिक होना ज़रूरी है। यही प्रावधान ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 ‘ की धारा 16 में भी बताया गया है, जिसके अनुसार अगर कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है, तो उसे मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए अयोग्य माना जाएगा। वर्ष 1980 में सोनिया गांधी भारतीय नागरिक नहीं थीं। इस संबंध में 1980 में अदालत में एक याचिका दायर की गयी थी जिसमें यह सवाल उठाया गया था कि श्रीमती गांधी को किस प्रावधान के तहत 1980 में वोट देने की अनुमति दी गई, जबकि उस समय वह भारतीय नागरिक नहीं थीं।श्री भंडारी ने सवाल किया कि क्या श्रीमती गांधी ने दस्तावेज़ों में हेरफेर करने की कोशिश की थी, क्योंकि 1980 से 1983 तक कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि ” श्रीमती गांधी से जुड़े लोकतंत्र की कथित चोरी की जांच होनी चाहिए। लोकतंत्र की इससे बड़ी चोरी और क्या हो सकती है, क्योंकि एक तरफ तो वे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध करने के नाम पर घुसपैठियों का समर्थन करते हैं, जबकि दूसरी तरफ, जब वे खुद जाली दस्तावेजों के जरिए लोकतंत्र की कथित चोरी करते हैं, तो चुप रहते हैं।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनवरी 1980 से 1983 और उसके बाद भी सत्ता में थी। कांग्रेस पार्टी को यह जवाब देना चाहिए कि ” क्या कांग्रेस और गांधी-वाड्रा परिवार ने श्रीमती गांधी को वोट देने लायक बनाने के लिए जाली दस्तावेज बनाए थे ?” उन्होंने कहा कि जाली दस्तावेज बनाना गंभीर अपराध है और भारतीय न्याय संहिता की धारा 337 के तहत ऐसे मामले में सात साल तक की सजा हो सकती है।

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