टिकटों को लेकर भाजपा से कोई विवाद नहीं होगा : केसी त्यागी

टिकटों को लेकर भाजपा से कोई विवाद नहीं होगा : केसी त्यागी

सहारनपुर, 08 अगस्त। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में युवा और छात्र आंदोलनों का कितना असर पड़ेगा तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) और भाजपा का गठबंधन सत्तारूढ़ दल को लगातार तीसरी बार सत्ता तक पहुंचाने में कितना कारगर साबित होगा, इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।भाजपा और रालोद के बीच विधानसभा चुनाव को लेकर सीटों के बंटवारे पर अभी कोई औपचारिक सीधी वार्ता शुरू नहीं हुई है। हालांकि, रालोद संसदीय दल के अध्यक्ष और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख जानकार केसी त्यागी ने शनिवार को कहा कि पार्टी अपने संगठन को जिलों में मजबूत करने और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुटी है।

श्री त्यागी ने कहा कि बृज प्रदेश, हस्तिनापुर प्रदेश और रूहेलखंड की करीब 85 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां रालोद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को जीत दिलाने और स्वयं भी बेहतर प्रदर्शन करने की स्थिति में है। उन्होंने कहा कि रालोद का नारा ‘मजबूत आरएलडी-मजबूत एनडीए’ है और सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा के साथ कोई विवाद नहीं होगा।पिछला विधानसभा चुनाव रालोद ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में लड़ा था। पार्टी के 33 उम्मीदवारों में आठ ने जीत दर्ज की थी, जबकि 15 प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे थे। बाद में खतौली विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जीत के साथ विधानसभा में रालोद की संख्या बढ़कर नौ हो गई थी।

रालोद ने 2024 का लोकसभा चुनाव भाजपा के साथ गठबंधन में लड़ा था। इस चुनाव में बिजनौर से रालोद के युवा प्रत्याशी चंदन चौहान तथा बागपत से डॉ. राजकुमार सांगवान ने जीत दर्ज की थी।दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं विधान परिषद सदस्य राजेंद्र चौधरी का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं का रुख चुनावी परिणामों को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक रहेगा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा-रालोद गठबंधन को मुश्किल से 20 से 22 प्रतिशत जाटों का समर्थन मिल सकता है।

श्री चौधरी ने कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने डिंपल यादव के बजाय जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजा था और बाद में उसी के आधार पर वह केंद्र सरकार में मंत्री बने। उन्होंने कहा कि सपा ने लोकसभा चुनाव में रालोद को सात सीटें दी थीं, जबकि भाजपा के साथ गठबंधन में उसे दो सीटें ही मिलीं। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि रालोद दोबारा सपा के साथ गठबंधन में लौटेगा।पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख जाट नेता और मुजफ्फरनगर से सपा सांसद हरेंद्र मलिक भी मानते हैं कि रालोद के सपा गठबंधन में वापस लौटने की संभावना कम है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि जयंत चौधरी सपा के साथ आना चाहेंगे तो वह इसकी सिफारिश सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस पर अंतिम निर्णय पार्टी अध्यक्ष ही करेंगे।

श्री मलिक का दावा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं का रुझान सपा की ओर है और भाजपा के साथ जाटों के संबंध सहज नहीं रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जयंत चौधरी फिलहाल जिस गठबंधन में हैं, वहीं बने रहेंगे।पूर्व उपमुख्यमंत्री चौधरी नारायण सिंह और चौधरी चरण सिंह के साथ काम कर चुके राजनीतिक चिंतक एवं बुद्धिजीवी चौधरी प्रीतम सिंह का मानना है कि भाजपा की लोकप्रियता में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि सरकार भले ही मजबूती के साथ चलाई जा रही हो, लेकिन लोग भय और दबाव वाली सरकार को पसंद नहीं करते।

उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक, बेरोजगारी और अन्य मुद्दों को लेकर छात्रों तथा युवाओं के आंदोलनों का असर चुनावों में दिखाई दे सकता है। उन्होंने बिहार के बांकीपुर और मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन मुद्दों का प्रभाव वहां दिखाई दिया।रालोद के बारे में श्री प्रीतम सिंह ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों की गहरी समझ रखने वाले केसी त्यागी के सक्रिय होने से जयंत चौधरी को लाभ मिल सकता है। यदि रालोद जिताऊ समीकरणों को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों का चयन करता है तो पार्टी को फायदा होगा।

हालांकि, जाट मतदाताओं के रुझान पर उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि 20 से 25 प्रतिशत से अधिक जाट मतदाता भाजपा-रालोद गठबंधन के पक्ष में जाएंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुर्जर मतदाताओं का रुख भी चुनावी समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।रालोद के बिजनौर सांसद चंदन चौहान गुर्जर समुदाय से आते हैं। उनके पिता संजय चौहान और दादा एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री चौधरी नारायण सिंह का भी गुर्जर समाज में प्रभाव रहा है। ऐसे में रालोद को गुर्जर मतदाताओं के बीच इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं, रालोद नेताओं का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की किसान समर्थक नीतियों और जयंत चौधरी के नेतृत्व में पार्टी के संगठनात्मक प्रयासों का लाभ आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन को मिल सकता है। पार्टी के अनुसार, जयंत चौधरी के निर्देशन में कार्यकर्ता और संगठन चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं।

आगामी चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट, गुर्जर और अन्य किसान मतदाताओं का रुख, युवा एवं छात्र मुद्दों का प्रभाव तथा भाजपा-रालोद गठबंधन की सीटों के बंटवारे की रणनीति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि रालोद-भाजपा गठबंधन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा को लगातार तीसरी बार सत्ता की राह आसान बनाने में कितना सफल रहता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *