अमेरिकी सीनेटर ब्लुमेंथल ने यूएसएस अब्राहम लिंकन की रिकॉर्ड तैनाती पर चिंता जतायी

अमेरिकी सीनेटर ब्लुमेंथल ने यूएसएस अब्राहम लिंकन की रिकॉर्ड तैनाती पर चिंता जतायी

वाशिंगटन, 13 अगस्त। अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन की लंबे समय से जारी तैनाती को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि इससे नौसैनिकों के स्वास्थ्य, अमेरिकी नौसेना की तैयारियों और भविष्य में किसी आपात स्थिति से निपटने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

श्री ब्लुमेंथल ने 12 अगस्त को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और नौसेना के कार्यवाहक सचिव हंग काओ को लिखे पत्र में कहा कि अब्राहम लिंकन 12 अगस्त तक 250 से अधिक दिनों से तैनात है, जबकि शुरुआत में इसकी तैनाती सात महीने के लिए निर्धारित की गयी थी। उन्होंने कहा कि विमानवाहक पोत 200 से अधिक दिनों से किसी बंदरगाह पर नहीं गया है, जो लगातार समुद्र में रहने का रिकॉर्ड है।

उन्होंने कहा कि पोत पर बुनियादी सामानों की कमी, पानी के दूषित होने, पाइपलाइन संबंधी समस्याओं, मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट, डेक की सुरक्षा और डाक व्यवस्था में परेशानी जैसी समस्याओं की रिपोर्ट सामने आयी है। उन्होंने कहा कि इससे यह सवाल उठता है कि क्या अमेरिकी नौसेना अपने विमानवाहक पोतों से लगातार बढ़ रही परिचालन गतिविधियों को लंबे समय तक बनाए रख सकती है। उन्होंने विशेष रूप से ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन अभियानों में विमानवाहक पोतों पर बढ़ती निर्भरता के कारण यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है।

श्री ब्लुमेंथल ने कहा कि अब्राहम लिंकन का मामला अकेला नहीं है। उन्होंने हाल की कुछ अन्य तैनातियों का भी उल्लेख किया, जो निर्धारित अवधि से काफी आगे बढ़ गयीं।उन्होंने यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड का उदाहरण देते हुए कहा कि यह विमानवाहक पोत मई में घर लौटने से पहले 326 दिनों तक समुद्र में रहा। यह सामान्य छह महीने की तैनाती अवधि से लगभग दोगुना और वियतनाम युद्ध के बाद अमेरिकी नौसेना की सबसे लंबी आधुनिक विमानवाहक पोत तैनाती थी।

श्री ब्लुमेंथल ने कहा कि अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियानों और क्षेत्र में लंबे समय तक बड़ी संख्या में अमेरिकी नौसैनिक बलों की आवश्यकता पड़ने की संभावना के बीच विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन ने अभी तक इन अभियानों के उद्देश्य, उन्हें समाप्त करने की स्थिति या उनकी संभावित अवधि के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी है। उनके अनुसार, लंबे समय तक चलने वाले सैन्य अभियान या विमानवाहक पोतों की लगातार तैनाती भविष्य में नौसेना की तैयारियों के लिए संकट पैदा कर सकती है।

श्री ब्लुमेंथल ने विमानवाहक पोत के चालक दल के सामने मौजूद जोखिमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नौसैनिकों को जेट इंजन, ईंधन, हथियारों, भारी मशीनरी, विद्युत प्रणालियों और परमाणु प्रणोदन प्रणाली के बीच काम करना पड़ता है और उन पर हमले का खतरा भी बना रहता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक समुद्र में रहने से थकान, लंबित रखरखाव और आराम तथा स्वास्थ्य लाभ के सीमित अवसर इन जोखिमों को और बढ़ा सकते हैं। सीनेटर ने नौसेना से अब्राहम लिंकन की तैनाती और विमानवाहक पोतों की व्यापक तैनाती व्यवस्था को लेकर कई सवालों का जवाब 27 अगस्त तक देने को कहा है।

उन्होंने अगले 12 से 24 महीनों में मध्य पूर्व में विमानवाहक पोत समूहों की मौजूदगी बनाए रखने की नौसेना की योजना, प्रस्तावित तैनाती और उसके कारण रखरखाव कार्यक्रमों तथा हिंद-प्रशांत सहित अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी मांगी है। उन्होंने अब्राहम लिंकन की तैनाती की अवधि में किये गये प्रत्येक विस्तार, उसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों और इसके लिए बताए गए परिचालन कारणों का भी विवरण मांगा है।

श्री ब्लुमेंथल ने पोत पर रहने की स्थिति से जुड़ी शिकायतों के बारे में भी जानकारी मांगी है। इनमें स्वच्छता संबंधी सामान की कमी, फफूंद, खराब शौचालय और कपड़े धोने की सुविधाएं, पर्याप्त पानी की उपलब्धता नहीं होना तथा अन्य समस्याएं शामिल हैं।

उन्होंने यह भी पूछा कि नौसेना चालक दल की थकान, मनोबल, मानसिक स्वास्थ्य और काम करने की क्षमता का आकलन करने के लिए क्या कदम उठा रही है।

सीनेटर ने यह सवाल भी उठाया कि क्या मौजूदा विमानवाहक पोत तैनाती की मांग नौसेना की मौजूदा क्षमता से अधिक है और क्या सैन्य तैनाती की रणनीति, रखरखाव क्षमता या नौसेना के बेड़े के आकार में बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने ईरान के संदर्भ में अब्राहम लिंकन की लगातार तैनाती के सैन्य उद्देश्य और इस बात की जानकारी भी मांगी कि पेंटागन किस आधार पर यह तय करता है कि क्षेत्र में विमानवाहक पोत की मौजूदगी अभी भी जरूरी है।श्री ब्लुमेंथल ने कहा कि नौसैनिकों और पोत को इस तैनाती के दौरान पर्याप्त सामान, रखरखाव और सहयोग देने के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था भी जरूरी है, जिसमें लगातार तैनाती बढ़ाकर सैन्य जरूरतें पूरी करने पर निर्भर न रहना पड़े। पत्र की एक प्रति नौसेना प्रमुख एडमिरल डेरिल एल. कॉडल को भी भेजी गयी है।

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