
नयी दिल्ली, 15 अगस्त । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि देश से हथियारबंद नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है, लेकिन ‘दिमागी नक्सली’ अभी मौजूद हैं और मौके की तलाश में हिंसा तथा अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं इसलिए ऐसे लोगों को पहचानना होगा, अलग-थलग करना होगा और देश की युवा पीढ़ी को विकसित राष्ट्र के निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना होगा।श्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी में दशकों पुरानी चुनौतियों को खत्म करना बहुत जरूरी है। नक्सलवाद और माओवाद ने लाखों युवाओं का भविष्य तबाह किया, अनेक माताओं के दूधमुंहे नौजवानों को उनसे छीन लिया और माता-पिता के सपनों को चूर-चूर कर दिया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद ने चार दशकों तक देश के बड़े हिस्से और बड़ी आबादी को बंदूक की नोक पर दबोचकर रखा तथा संविधान की धज्जियां उड़ाईं। आम नागरिकों की रक्षा करते हुए 3500 से अधिक पुलिस और सुरक्षा बल के जवान शहीद हुए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 में देश की जनता ने उनकी सरकार को अवसर दिया तो उसी दिन उन्होंने देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा, ”आज मुझे खुशी है कि नक्सली-माओवादी हिंसा आखिरी सांस भी शायद लेने की ताकत नहीं रखती है।” जिन इलाकों में कभी नक्सलियों की गोलियां चलती थीं और धरती रक्तरंजित हुआ करती थी, आज उन्हीं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सल मुक्त होने के कारण विकास, विश्वास और प्रयास का तिरंगा लहरा रहा है।श्री मोदी ने हालांकि आगाह किया कि इस चुनौती को कम नहीं आंकना है और इससे और भी सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक देश की सत्ता के गलियारों में माओवादी सोच के लोग अपनी जगह बनाकर बैठे रहे। सरकारी समितियों में सलाहकार के रूप में भी माओवादी सोच के लोगों ने नीतियों को प्रभावित किया। उनका कहना था कि जंगलों में हथियारबंद नक्सलों के खात्मे और उस संकट से देश को मुक्त कराने में सफलता तो मिली है, हथियारबंद नक्सल तो चले गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। ये लोग हिंसा और अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं तथा समाज को गलत राह पर घसीटने के लिए तरह-तरह के दांव चल रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन ‘दिमागी नक्सलियों’ को पहचानना होगा और उन्हें अलग-थलग करना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को विकसित राष्ट्र बनाने की मुख्यधारा की ओर देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा।श्री मोदी ने कहा कि सुरक्षित भारत बनाना हम सबका दायित्व है। चुनौती सीमा के भीतर हो या सरहद से बाहर, भारत हर परिस्थिति के लिए तैयार है। आज युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और अब यह जरूरी नहीं है कि युद्ध केवल सीमा पर ही हो। रिफाइनरी, बैंकिंग क्षेत्र और डेटा सेंटर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निशाना बनाकर भी युद्ध का नया रूप सामने आ सकता है तथा बुनियादी ढांचे और कारखानों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले वर्षों में ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ की घोषणा की थी और उस पर बहुत तेजी से काम चल रहा है। भारत का रक्षा निर्यात करीब 50 गुना बढ़ा है और करीब 100 देशों में देश के अस्त्र-शस्त्र पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक पटल पर भारत की प्रतिष्ठा धीरे-धीरे बढ़ रही है। बदलते समय में अस्त्र-शस्त्र के क्षेत्र में काम करने और सैन्य बलों का सामर्थ्य बढ़ाने के साथ-साथ नागरिकों को भी तैयार करना होगा।उन्होंने लाल किले से घोषणा की कि आने वाले दिनों में नागरिक सुरक्षा का एक जीवंत और आधुनिक नेटवर्क खड़ा किया जाएगा। नागरिकों को आधुनिक व्यवस्थाओं और आधुनिक संकटों से निपटने के उपायों से परिचित कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम नागरिक सुरक्षा का एक बड़ा स्वयंसेवी बल तैयार किया जाएगा।