
नयी दिल्ली, 15 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ठोस धरातल पर बताते हुए इसे हासिल करने के लिए सप्तधारा की सप्त-शक्ति का मंत्र दिया है और विश्वास जताया है कि देश जनभागीदारी के आधार पर इसे हासिल करेगा और इसमें सबसे बड़ी भूमिका युवा शक्ति की होगी तथा युवा वर्ग ही इसका सबसे बड़ा लाभार्थी होगा।श्री मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से पहली बार राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम् के पूर्ण गायन के साथ शनिवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश में वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में रोजगार, महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक गतिरोध जैसे मुद्दों पर विस्तार से बात रखी। उन्होंने छात्र आंदोलन की गूंज के बीच मनाये जा रहे राष्ट्रीय पर्व पर एक करोड़ युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रशिक्षण देने, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पूरे देश में निशुल्क ऑनलाइन कोचिंग नेटवर्क बनाने , नशा मुक्त भारत के लिए 100 सप्ताह के अभियान की शुरुआत करने , 2036 के ओलंपिक में ज्यादा से ज्यादा स्पर्धाओं में भारत की भागीदारी के लिए प्रतिभा खोज जैसी पहलों की घोषणा की। उन्होंने भविष्य की चुनौतियों और खतरों से निपटने के लिए देश में अत्याधुनिक सिविल डिफेंस नेटवर्क खड़ा करने का भी एलान किया। इस बार के स्वतंत्रता दिवस समारोहों का मुख्य विषय भी युवा शक्ति पर ही केन्द्रित है।
प्रधानमंत्री ने सप्तधारा की सप्त शक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें विनिर्माण शक्ति, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, गतिशक्ति, रक्षा शक्ति, हरित अर्थव्यवस्था एवं ब्लू इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर शामिल हैं। उन्होंने इनके बारे में विस्तार से उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि उन्हें देश की युवा शक्ति, माताओं-बहनों, किसानों और मजदूरों पर भरोसा है कि सब मिलकर विकसित भारत के सपने को साकार कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ” हम सुधार के पथ पर चल चुके हैं, और आने वाले समय में सुधारों के अगले स्तर की तरफ बढ़ने वाले हैं। सरकार, समाज, उद्योग, उत्पादक, किसान हर किसी को अपनी पारंपरिक व्यवस्थाओं में बदलाव लाना होगा, सोच बदलनी होगी, लक्ष्य बदलना होगा।”प्रधानमंत्री ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने के दशकों से लंबित प्रस्ताव को लागू करने के लिए विपक्ष से करबद्ध अपील भी की। सरकार इससे संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को संगठित विपक्ष के विरोध के चलते गत अप्रैल में पारित कराने में विफल रही थी और मानसून सत्र में भी प्रयासों के बावजूद यह विधेयक पेश नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा, ” मैं देश के सभी राजनीतिक दलों से आज लाल किले की प्राचीर से तिरंगे झंडे की छाया में खड़े होकर के प्रार्थना करता हूं, आग्रह करता हूं। आइए, उन महिलाओं के सामर्थ्य के पुजारी बनिए। उन महिलाओं के सम्मान में आगे आइए और जल्द से जल्द हमारी माताओं-बहनों को 33 प्रतिशत विधानसभा और लोकसभा में उनको प्रतिनिधित्व मिले, वह भारत की नीति गढ़ करके अंदर अपना योगदान दें। समय की मांग है और मैं सभी राजनीतिक दलों से फिर से आग्रह करता हूं, आइए महिला आरक्षण लागू करके महिला सम्मान में आप भी जुड़िए, आप भी यश लीजिए, आप भी क्रेडिट लीजिए, लेकिन मेरी माताओं-बहनों को हक दीजिए।”
श्री मोदी ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए नीतिगत सुधारों की रफ्तार का संकल्प दोहराते हुए लोगों से विकास की राह में रोड़े अटकाने वालों को पहचानने और उनसे सावधान रहने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने ‘हथियारी नक्सलियों’ का सफाया कर दिया है लेकिन ‘दिमागी नक्सली’ अभी भी मौके की तलाश में बैठे हैं। उन्होंने कहा,” जंगलों में हमें हथियारी नक्सलों का खात्मा बुलाने में उस संकट से देश को मुक्त कराने में सफलता मिली है, लेकिन हथियारी नक्सल तो गये, लेकिन दिमागी नक्सल, यह दिमागी नक्सल मौके की तलाश में है। हिंसा अराजकता के वे रास्ते खोज रहे हैं। समाज को गलत राह पर घसीटने के लिए भांति-भांति के दांव कर रहे हैं। इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा। इन दिमागी नक्सलियों को आइसोलेट करना होगा और राष्ट्र को विकसित राष्ट्र बनाने की मुख्यधारा की ओर देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा।”नशा मुक्त भारत अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश के सामाजिक सांस्कृतिक संगठनों ने, देश के आध्यात्मिक पुरुषों ने मिलकर के नशा मुक्त भारत का 100 सप्ताह का एक कार्यक्रम तय किया है।
उन्होंने कहा, ” मैं हर परिवार को कहना चाहता हूं कि आप भी इस अभियान का हिस्सा बने, आप इसके साथ जुड़िए और देश के नशा मुक्त भारत के सपने को पूरा करने के लिए आप आगे आइए।” उन्होंने चहुंमुखी विकास की गति को बढ़ाने के लिए सबके सहयोग और नियमों तथा नीतियों में सुधारों की गति बढाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि पुरानी नीतियों और नियमों से इक्कसवीं सदी में काम नहीं चलेगा।प्रधानमंत्री ने देशवासियों को झकझोरते हुए कहा, ” देश सिर्फ सरकार का नहीं हर नागरिक का होता है , विकास में नागरिकों, स्थानीय निकायों से लेकर केन्द्र सरकार तक सभी की जिम्मेदारी होती है।” प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों की अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि आजादी के बाद पिछले एक दशक में जिस रफ्तार से काम हुआ है वह किसी भी दशक की तुलना में सबसे अधिक तथा तेज है। उन्होंने बड़े सपने और बड़े संकल्प के साथ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संकल्प दृढ हो तो सामर्थ्य बढता है और देश को 140 करोड़ जनता के साथ मिलकर 2047 तक देश को विकसित बनाना है। उन्होंने कोरोना काल और उसके बाद यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में भू राजनीतिक संकटों का सफलतापूर्वक सामना करने की देश की उपलब्धियों का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक से वैश्वीकरण की बात बंद हो गयी है। बहुत से देश संसाधनों, औषधियों , उर्वरकों, प्रौद्योगिकी और यहां तक कि जमीन को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं ऐसे में देश को दूसरों के सहारे नहीं रखा जा सकता है।
श्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक हम रफ्तार नहीं पकड़ पाये थे और ‘हो जायेगा’ की सोच ने आगे नहीं बढने दिया और 2़014 तक हमें कमजोर देशों में गिना जाने लगा था। पिछले 12 वर्षों में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं, जो पूरे देश का प्रयास है और हम ‘फ्रेजाइल फाइव’ से निकल कर दुनिया की चार बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गये हैं। देश तेजी से बढ रहा है। इन 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन चार गुना, खादी ग्रामोद्योग पांच गुना, इलेक्ट्रॉनिक्स सात गुना , आधुनिक रेलवे कोच 21 गुना , मोबाइल फोन उत्पादन 35 गुना , इंटरनेट यूजर चार गुना , डिजिटल लेन देन 100 गुना बढा है। उन्होंने इसी तरह अवसंरचना क्षेत्र में हुए तीव्र विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए पुराने कानूनों को खत्म किया गया है। देश महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में अपने को सुरक्षित कर रहा है तथा कई देशों के साथ समझौते किये गये हैं। ए आई और डेटा सेंटर आदि के लिए बिजली की जरूरत को देखते हुए ऊर्जा सुरक्षा बढ़ायी जा रही है। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने के लिए ‘शांति विधेयक’ पारित किया गया है और 2047 तक 100 गीगावाट (एक लाख मेगावाट) परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है और दस वर्ष पांच नये परमाणु बिजली घर शुरू किये जाने हैं। फास्ट ब्रीडर रियेक्टर प्रौद्योगिकी में सफलता से परमाणु ईंधन की निर्भरता को कम करने का कदम उठाया गया है।प्रधानमंत्री ने कहा कि मेक इन इंडिया , वोकल फॉर लोकल इन सबसे हर भारतीय का मन आज जुड़ रहा है। उन्होंने आधुनिक अर्थव्यवस्था में सेमीकंडक्टर के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि देश में तीन कारखानों में इसका उत्पादन शुरू हो गया है और भारत निर्यात भी करने लगा है। उन्होंने कहा, ” भारत का प्रोफाइल पूरी तरह बढ़ रहा है। आज भारत दुनिया के लिए एक स्वीकृत और सम्माननीय देश के रूप में बन रहा है। भारत के पास स्थिर पॉलिटिकल मैंडेट है, स्थिर सरकार है, भारत का वाइब्रेंट लोकतंत्र है, भारत का मजबूत न्याय तंत्र है और हम सबको दिशा देने वाला भारत का संविधान है और अब दुनिया हमारे इस सामर्थ्य को पहचानने लगी है।”
दुनिया के 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते को बडा अवसर करार देते हुए कहा कि देश के छोटे, मझौले उद्योगाें को इसका फायदा उठाना है। उन्होंने कहा कि भारत के उत्पाद की हर चीज विश्व के बाजार में पहुंचे लेकिन इसके लिए हमें वैश्विक मानकों को पार करना होगा। उन्होंने कहा , ” हमें दुनिया से जो मिलता है, उससे अच्छा देना पड़ेगा। दुनिया में जो मिलता है, उससे सस्ता देना पड़ेगा । उन्होंने कहा कि गुणवत्ता के साथ किसी तरह का समझौता नहीं चलेगा और तभी भारत के उत्पाद दुनिया में अलग ब्रांड के रूप में अपनी पहचान बना सकेंगे।”प्रधानमंत्री ने भाषण की शुरुआत में ही पिछले दिनों देश में बाढ़ और अन्य आपदाओं के प्रकोप का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार और देश प्रभावित लोगों के साथ खड़ा है।
उन्होंने कहा, ” पिछले दिनों, देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ का प्रकोप रहा, भूस्खलन का प्रकोप रहा, अनेक परिवार प्रभावित हुए। उनके दुख, दर्द को हम भलिभांति अनुभव करते हैं। पीड़ित परिवारों को मैं विश्वास दिलाता हूं कि हम और पूरा देश उनके साथ खड़े हैं।”प्रधानमंत्री ने देश के निर्माण में महान हस्तियों तथा स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया और उनके आदर्शों ,प्रेरणा और संकल्पों का उल्लेख करते हुए देशवासियों से विकसित भारत के लिए संकल्प लेने का आह्वान किया और कहा कि सभी को इसमें आहूति देनी होगी। उन्होंने कहा , ” स्वयं से ऊपर राष्ट्र का हित हो। कर्तव्य ही हमारी पहचान हो। मैं सभी देशवासियों से कहूंगा समय हमारा है, अवसर हमारा है, संकल्प हमारा है, आइए सपनों को संकल्प बनाएं, संकल्प को सामर्थ्य बनाएं और सामर्थ्य को सफलता में बदल के रहें। आइए हर कदम को विकास का कदम बनाएं, कदम से कदम मिलाएं, मन से मन मिलाए, लक्ष्य से जुड़े रहे, एक दीप से जले दीप हजारों, आओ मिलकर विकसित भारत बनाएं।”
श्री मोदी ने कहा कि भारत का लक्ष्य 2036 के ओलंपिक में हर खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का होना चाहिए। खेल के लिए प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान करने और उन्हें खेलों की तैयारी के लिए बेहतरीन प्रशिक्षण और मदद देने के लिए देश भर में ‘टैलेंट हंट’ अभियान शुरू किया जाएगा।श्री मोदी ने कहा, “मैं हमेशा कहता आया हूं, जो खेले, वह खिले।”