
वाशिंगटन/तेहरान, 19 अगस्त। लगातार बढ़ते तनाव और अमेरिकी सेना पर बढ़ते दबाव के बीच ईरान युद्ध अगले सप्ताह छह महीने के पड़ाव पर पहुंचने वाला है, जिसमें अमेरिका-ईरान दोनों एक-दूसरे को पछाड़ने की होड़ में हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार वादा किया था कि युद्ध छोटा और निर्णायक होगा और उन्होंने संकल्प जताया था कि यह ‘बहुत जल्द’ समाप्त हो जायेगा।एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, श्री ट्रम्प के दावे के विपरीत इसके लंबे खिंचने के स्वभाव ने गोला-बारूद के भंडार, रक्षा अनुबंधों और समुद्र में आपूर्ति जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा के कभी-विशेष चिंता वाले विषयों को व्यापक सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
अमेरिकी नौसेना विशेष रूप से जांच के दायरे में आ गयी है, क्योंकि लंबी तैनाती के कारण जहाजों, नौसैनिकों, मरीन और उनके परिवारों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। श्री ट्रंप ने इसी सप्ताह कहा है कि वह चाहते हैं कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना दावा पेश करे और उन्होंने ट्रुथ सोशल पर नक्शा पोस्ट कर इस रणनीतिक जलमार्ग को ‘अमेरिकी क्षेत्र’ का दर्जा दे दिया है।
उन्होंने ओमान पर बमबारी करने की भी धमकी दी, भले ही यह खाड़ी देश अमेरिकी हथियारों का प्रमुख खरीदार है। नौसेना पर दबाव अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। प्रशांत महासागर में कार्यरत अमेरिकी विमानवाहक पोत ‘यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन’ को ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ का स्थान लेने के लिए पश्चिम एशिया भेजा जा रहा है, जो समुद्र में 250 से अधिक दिन बिता चुका है।मानसिक तनाव से जूझ रहे कई नौसैनिकों के समुद्र में कूदने के प्रयास की रिपोर्टों के बाद लिंकन की लंबी तैनाती जांच के घेरे में आ गयी है।
इस बीच, पेंटागन को युद्ध से जुड़ी जानकारियों को संभालने के तरीके को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इस विभाग ने महीनों से कोई प्रेस ब्रीफिंग नहीं की है और उस पर अपने ऑनलाइन कैजुअल्टी ट्रैकर के माध्यम से अमेरिकी सैन्य मौतों की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया है।