
वाशिंगटन, 23 अगस्त। अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कनाडा को अमेरिका का ’51वां राज्य’ बनाने की अपनी मांग दोहराते हुए आरोप लगाया कि कनाडा बिना अमेरिकी राज्य बने उसके फायदे हासिल करना चाहता है।
श्री ट्रंप ने वार्ता विफल होने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में शनिवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “कनाडा एक राज्य होने के फायदे चाहता है, लेकिन राज्य बनना नहीं चाहता। उन्होंने कई वर्षों तक हमारे महान किसानों पर भारी शुल्क लगाए हैं। अब और नहीं।”वार्ता टूटने के बाद अमेरिका ने कनाडा के कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत नया शुल्क लागू कर दिया है।
श्री ट्रंप की यह टिप्पणी कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता स्थगित किए जाने के बाद आई। कार्नी ने कहा था कि वाशिंगटन की ताजा मांगें “आर्थिक रूप से अव्यावहारिक” और “अनुचित” हैं तथा इनसे किसी भी संभावित समझौते के लाभ प्रभावित होते हैं।श्री कार्नी ने कहा, “उन्होंने बहुत ज्यादा मांगा और बहुत कम की पेशकश की।” उन्होंने अमेरिकी कदमों को कनाडा पर हमला बताते हुए नए शुल्कों को “गलत आकलन” करार दिया और कहा कि इनका उद्देश्य “हमें नुकसान पहुंचाना और बांटना” है।
अमेरिका ने 22 अगस्त से करीब 28 अरब डॉलर मूल्य के कनाडाई आयात पर 50 प्रतिशत शुल्क लागू किया है। इन शुल्कों के दायरे में कनाडा के अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात का करीब 5.5 प्रतिशत हिस्सा आता है। प्रभावित उत्पादों में हॉकी स्टिक और सीमेंट समेत कई अन्य सामान शामिल हैं।श्री कार्नी ने कहा कि कनाडा अपने श्रमिकों, किसानों, परिवारों और कारोबारों की सुरक्षा के लिए 8 सितंबर से अमेरिकी शुल्क का “डॉलर के बदले डॉलर” जवाब देगा। हालांकि, जवाबी शुल्कों का विस्तृत स्वरूप अभी घोषित नहीं किया गया है।
श्री कार्नी के अनुसार, कनाडा इस्पात, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर लगाए गए अपने शेष जवाबी शुल्क हटाने को तैयार था, बशर्ते अमेरिका अपने शुल्कों में पर्याप्त कमी करता। कनाडा अन्य देशों के साथ स्वतंत्र रूप से व्यापार समझौते करने की अपनी क्षमता पर किसी तरह का प्रतिबंध स्वीकार नहीं करेगा।अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि कनाडा ने वाशिंगटन के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से इनकार कर दिया। उन्होंने पुष्टि की कि नए शुल्क 22 अगस्त से प्रभावी हो गये हैं। वार्ता के विफल होने से उत्तरी अमेरिका के दोनों पड़ोसी देशों के बीच व्यापार तनाव एक बार फिर तेज हो गया है और दोनों सरकारें आगे और जवाबी शुल्क लगाने की तैयारी कर रही हैं।