
तेहरान, 23 अगस्त। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ईरान-पाकिस्तान संबंधों को मजबूत करने तथा क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत सोमवार को एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ ईरान का दौरा करेंगे।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने रविवार को इसकी जानकारी दी। ईरान सरकार ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि मुनीर की यात्रा के दौरान ईरान-पाकिस्तान संबंधों को मजबूत करने तथा क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।
पाकिस्तान फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों से शुरू हुए युद्ध को समाप्त कराने के प्रयासों के तहत तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थता कर रहा है। श्री मुनीर की यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ और कड़े प्रतिबंध लगाने की चेतावनी पर भी चर्चा होने की संभावना है।
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका की ओर से अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की योजना को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। ईरान ने चेतावनी दी है कि उसकी अर्थव्यवस्था पर और दबाव डालने वाले अमेरिकी कदमों का वह जवाब देगा।
इस बीच, श्री बघाई ने नये अमेरिकी प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना करते हुए इन्हें ईरान के खिलाफ वाशिंगटन के ‘आर्थिक युद्ध’ का विस्तार बताया।
उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ नए आर्थिक प्रतिबंधों की अमेरिकी घोषणा किसी एक देश के विरुद्ध जारी ”गैरकानूनी आर्थिक युद्ध” से कहीं आगे की बात है और यह संयुक्त राष्ट्र के प्रत्येक स्वतंत्र सदस्य देश पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर अमेरिकी संप्रभुता थोपने का प्रयास है।
श्री बघाई ने कहा कि कोई भी देश विदेशी बैंकों, कंपनियों या हवाई अड्डों को किसी तीसरे देश के साथ वैध व्यापार छोड़ने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं कर सकता, क्योंकि वे अपने-अपने देशों के अधिकार क्षेत्र के अधीन हैं।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के निकारागुआ मामले में दिये गये फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी संप्रभु देश को अपनी नीतियां बदलने के लिए आर्थिक दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।
ईरानी प्रवक्ता ने विदेशी बैंकों, कंपनियों और हवाई अड्डों को निशाना बनाने वाले अमेरिकी द्वितीयक प्रतिबंधों को भी अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिबंधों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और ये संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(1) में निहित संप्रभु समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं।
श्री बघाई ने अमेरिकी प्रतिबंधों को समुद्री नाकेबंदी से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि इस तरह के कदम संयुक्त राष्ट्र आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में देशों की संप्रभुता को कमजोर करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की आर्थिक एवं सैन्य कार्रवाइयों को स्वीकार करना देशों के बैंकों, कंपनियों और हवाई अड्डों पर किसी विदेशी शक्ति के अधिकार को मान्यता देने जैसा होगा। उन्होंने इसे संप्रभुता पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के क्षरण और “पुराने औपनिवेशिक दौर की ओर वापसी” का रास्ता करार दिया।