
तेहरान, 24 अगस्त । ईरान ने कहा है कि वह मौजूदा संघर्ष को उस पक्ष की शर्तों पर खत्म नहीं होने देगा, जिसे वह हमलावर मानता है।ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ईरान अपने देश की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह दृढ़ है। उन्होंने कहा कि ईरानी अधिकारी देश की रक्षा करने और दबाव के जरिये थोपी गयी किसी भी मांग को खारिज करने के अपने संकल्प को स्पष्ट कर चुके हैं।
श्री बघाई ने कहा, “हम आक्रामकों के प्रति कोई नरमी नहीं बरतेंगे।” उन्होंने कहा कि ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया था और उसने अपने क्षेत्र, संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कार्रवाई की है। उन्होंने कहा, “हम युद्ध को हमलावर की शर्तों पर खत्म नहीं होने देंगे।” श्री बघाई की यह टिप्पणी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की हाल की उस टिप्पणी पर पूछे गए सवालों के जवाब में की गई है जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के मजबूत स्थिति में रहते हुए युद्ध खत्म करना बेहतर होगा।श्री बघाई ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि श्री पेजेशकियन की टिप्पणी से यह संकेत मिलता है कि ईरान अपने विरोधियों के सामने कोई रियायत देने के लिए तैयार है।
श्री बघाई ने कहा कि श्री पेजेशकियन ने बार-बार कहा है कि ईरान दबाव, जबरदस्ती या विदेशी प्रभुत्व के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि 40 दिनों तक चले युद्ध के दौरान और इससे पहले हुए 12 दिनों के संघर्ष के दौरान भी ईरानी सरकार और सभी सरकारी शाखाओं ने देश की रक्षा के लिए एकजुट होकर और एक आवाज में काम किया। उन्होंने कहा, “इन मुद्दों को अलग-अलग देखना तर्कसंगत नहीं है।” उन्होंने कहा कि ईरान का नेतृत्व सभी स्तरों पर देश की रक्षा करने और आक्रामकों की उन मांगों को खारिज करने के लिए दृढ़ है। श्री बघाई ने कहा कि अमेरिका के साथ तनाव लगातार बढ़ने के बीच ईरान अमेरिका के आर्थिक दबाव का मुकाबला करने के लिए अपने पास मौजूद सभी साधनों का इस्तेमाल करेगा।गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 अगस्त को ईरान के खिलाफ एक आर्थिक अभियान शुरू करने की घोषणा की थी। उन्होंने इसे ईरान को अलग-थलग करने के लिए एक अभूतपूर्व अभियान बताया और सहयोगी देशों से अमेरिका के प्रयासों में शामिल होने का आह्वान किया। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में इन उपायों के बारे में और जानकारी देने की उम्मीद है।श्री बघाई ने संवाददाताओं से कहा, “ईरान आर्थिक प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए अपने सभी बहुपक्षीय विकल्पों का निश्चित रूप से इस्तेमाल करेगा।” उन्होंने कहा कि ईरान ने ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही कदम तैयार कर रखे हैं और कई देशों को चेतावनी दी है कि अमेरिकी कार्रवाइयों में सहयोग करने ( जिसमें संभावित नौसैनिक नाकाबंदी भी शामिल है) के परिणाम हो सकते हैं।
श्री बघाई ने पश्चिमी मीडिया की उन रिपोर्टों का भी जवाब दिया, जिसमें कहा गया है कि अगर फिर से युद्ध शुरू होता है तो ईरान यूरोपीय देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान उन देशों को संभावित रूप से आक्रामक कार्रवाई में शामिल मानता है, जो अपने क्षेत्र, सैन्य ठिकानों या सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए करने की अनुमति देते हैं। उन्होंने खास तौर पर उन रिपोर्टों का जिक्र किया कि अमेरिकी केसी-135 ईंधन भरने वाले विमान बुल्गारिया से रवाना हो गये हैं। उन्होंने कहा कि ईरान पहले ही बुल्गारिया को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है।श्री बघाई ने कहा कि ईरान का बुल्गारिया के लोगों के साथ कोई विवाद नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि देश से अमेरिकी सैन्य संसाधनों को काम करने की अनुमति देना ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों का समर्थन करने के बराबर है।
उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि दूसरे देश भी जरूरी कदम उठाएंगे। यह कार्रवाई उन सभी देशों के खिलाफ होगी जिन्होंने किसी न किसी रूप में अमेरिक और इजरायली शासन को संयुक्त राष्ट्र के एक सदस्य देश के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई का अपराध करने के लिए अपने सैन्य ठिकानों और सुविधाओं का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है।”ईरानी प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि अन्य देशों को ईरान की कार्रवाई से डरने की कोई वजह नहीं है, जब तक वे अपने सैन्य ठिकानों, सुविधाओं या सैन्य उपकरणों का इस्तेमाल उन हमलों के लिए नहीं करने देते, जिन्हें ईरान गैरकानूनी मानता है।श्री बघाई ने कहा, “ईरान के इस्लामी गणराज्य के खिलाफ किसी भी आक्रामक कार्रवाई के स्रोत और उसके मूल स्थान को निशाना बनाना ईरान का अधिकार है।” उन्होंने कहा कि ईरान देश की रक्षा करना जारी रखेगा।
उन्होंने उन रिपोर्टों का भी खंडन किया कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच प्रस्तावित रक्षा व्यवस्था में शामिल होने के लिए ईरान को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा, “हमें इस संबंध में कोई आधिकारिक निमंत्रण नहीं मिला है।”श्री बघाई के अनुसार, अब तक क्षेत्रीय देशों की ओर से रखे गए प्रस्तावों में मुख्य रूप से बातचीत, विचार-विमर्श और सामूहिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहयोग पर जोर दिया गया है, न कि किसी औपचारिक रक्षा व्यवस्था पर।श्री बघाई ने विदेश मंत्रालय की प्रशासनिक प्रणाली में सुधार की कोशिशों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि जून 2025 से 17-सूत्रीय निर्देश के तहत यह प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि प्रक्रियाओं को मजबूत करने और कुल मिलाकर कामकाज को बेहतर बनाने के लिए मंत्रालय के प्रशासनिक और वित्तीय मामलों के उप प्रमुख की देखरेख में एक समिति बनायी गयी है, जिसमें संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सुधारों के कई क्षेत्रों में, खासकर दूतावास की सेवाओं में ठोस नतीजे भी दिखे हैं। उन्होंने अरबीन यात्रा के दौरान ईरानी तीर्थयात्रियों को दी गयी मदद का ज़िक्र किया, जिसमें वीज़ा से जुड़ी और दूसरी वाणिज्यिदूत संबधी सेवाएं शामिल थीं।
श्री बघाई ने कहा कि विदेश मंत्रालय ने पिछले डेढ़ साल में बेहद मुश्किल हालात के बावजूद अपनी कूटनीतिक जिम्मेदारियां निभाई हैं, जिसमें अमेरिका और इज़राइल से जुड़े दो युद्ध भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, “पिछले एक से डेढ़ साल के दौरान हमें अमेरिका और इजरायली शासन द्वारा थोपे गए दो युद्धों के कारण पैदा हुए खास हालात का सामना करना पड़ा है, और विदेश मंत्रालय ने युद्ध और संकट के माहौल में भी कूटनीति को आगे बढ़ाया है।”