
नयी दिल्ली, 06 सितंबर । दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर लड़कों के लिए पीजी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा पांच मंजिला भवन ढहने से कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गयी और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गये। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका के बीच बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।घायलों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। अस्पताल के अनुसार, घटनास्थल से चार लोगों को ट्रॉमा सेंटर लाया गया, जिनमें दो की हालत गंभीर है। इनमें एक बचावकर्मी भी था, जिसे बाद में अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी, जबकि एक व्यक्ति को मृत अवस्था में लाया गया।
अधिकारियों के अनुसार, मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों ने यह संख्या 15 से अधिक बतायी है, हालांकि अधिकारियों ने कहा कि अभी फंसे लोगों की सही संख्या की पुष्टि नहीं हुई है।घटनास्थल पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने प्रारंभिक आकलन के आधार पर बताया कि हादसे के समय भवन में करीब 40 से 50 लोग मौजूद हो सकते थे।
दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) और केंद्रीयकृत दुर्घटना एवं ट्रॉमा सेवाओं (कैट्स) की टीमों ने तत्काल संयुक्त बचाव अभियान शुरू किया। आठ दमकल गाड़ियों को मौके पर भेजा गया, जबकि एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन दल भी तैनात किये गये।पुलिस के अनुसार, ताजा जानकारी मिलने तक छह लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया जा चुका था और बचाव एवं तलाशी अभियान जारी है।
पुलिस ने बताया कि दक्षिण कैंपस थाने में दोपहर करीब 1:34 बजे सत्य निकेतन मार्केट में भवन ढहने की सूचना मिली। दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ, दिल्ली अग्निशमन सेवा और डीडीएमए की टीमें दमकल गाड़ियों और कैट्स एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया। नयी दिल्ली रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त, दक्षिण-पश्चिम जिले के पुलिस उपायुक्त और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अभियान की निगरानी कर रहे हैं।पुलिस की स्थानीय जांच के अनुसार, भवन करीब 40 से 50 वर्ष पुराना था। इसमें एक तहखाना और उसके ऊपर पांच मंजिलें थीं तथा इसका इस्तेमाल पीजी के रूप में किया जा रहा था। हादसे के समय तहखाने में मरम्मत का काम चल रहा था।
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि भवन गिरने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गयी। पास की एक दुकान के मालिक ने बताया कि शुरुआत में लोगों को लगा कि भवन गिरने की आवाज भूकंप की वजह से हुई है।प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, घटनास्थल से धूल और धुएं का बड़ा गुबार उठा। उसने दावा किया कि बचावकर्मियों ने मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला, जिनमें चार बच्चे भी शामिल थे। उसने यह भी बताया कि मलबे के नीचे से अब भी मदद के लिए आवाजें सुनाई दे रही थीं।
उसने बताया कि आसपास लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग पीजी संचालित होते हैं। उसके अनुसार, तहखाने में निर्माण कार्य चल रहा था और निचले हिस्से में किए गए बदलाव भवन गिरने की वजहों में से एक हो सकते हैं।एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने ढहे भवन की पहचान “हॉस्टल डेज” नामक लड़कों के पीजी के रूप में की। उसने बताया कि पड़ोसी भवन भी ढह गया था और दावा किया कि कमरों में मौजूद छात्र मलबे में दब गये।
प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि फंसे लोगों की वास्तविक संख्या पीजी के पंजीकरण रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगी। उसने बताया कि बचावकर्मियों को मलबे के नीचे फंसे लोगों तक पहुंचने में काफी कठिनाई हो रही है और कई छात्रों को गंभीर चोटें आयी हैं।कैट्स के नोडल अधिकारी बलराज सिंह ने घटनास्थल पर बताया कि पांच लोगों को एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया है और उनकी स्थिति के बारे में चिकित्सकीय अधिकारी आगे जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार हादसे में 25 से 30 लोग प्रभावित हो सकते हैं। आपातकालीन राहत कार्य के लिए 17 एंबुलेंस तैनात की गयी हैं।
दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही भी घटनास्थल पर पहुंचे और लोगों से अपील की कि वे आपातकालीन कर्मियों के बचाव कार्य में बाधा न डालें।यह हादसा दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर (साउथ कैंपस) के पास स्थित घनी आबादी वाले सत्य निकेतन इलाके में हुआ, जहां बड़ी संख्या में छात्र छात्रावासों और किराये के आवासों में रहते हैं।
बचावकर्मी लगातार मलबे और कंक्रीट की परतें हटाकर तलाशी अभियान चला रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि अभी मलबे में फंसे लोगों की संख्या की पुष्टि नहीं की जा सकी है। अभियान का मुख्य उद्देश्य जीवित लोगों का पता लगाना और मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है।