
मथुरा 5 सितंबर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार आधी रात को ठीक 12 बजते ही कान्हा की नगरी मथुरा असीम आस्था और उल्लास के महासागर में डूब गई। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, अधर्म का नाश और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने इसी पावन बेला में अवतार लिया था। जन्म की घोषणा होते ही पूरी जन्मभूमि ‘जय श्री कृष्णा’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठी।शंखनाद और जयकारों से गूंजा प्रांगण मध्यरात्रि 12 बजते ही मंदिरों में घंटे-घड़ियाल, मंजीरे और शंख बजने लगे। मंदिर परिसर में मौजूद लाखों श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया। ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ और ‘नंद के घर आनंद भयो’ के उद्घोष से समूचा वातावरण संगीतमय हो गया।
बाल स्वरूप का मनमोहक श्रृंगार जन्मोत्सव की मुख्य विधियों के तहत बालगोपाल के बाल स्वरूप का अलौकिक श्रृंगार किया गया। उन्हें नए रेशमी वस्त्र और रत्नजड़ित आभूषणों से सजाया गया। इसके बाद विधि-विधान से भगवान की महाआरती उतारी गई। भक्तों ने कतारबद्ध होकर अपने आराध्य के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। इस दौरान माता देवकी और पिता वासुदेव के जयकारों से भी परिसर गूंजता रहा।भजन कीर्तन पर थिरके भक्त मथुरा की गलियों से लेकर मुख्य मंदिरों तक हर आयु वर्ग के श्रद्धालु भक्ति के रंग में रंगे नजर आए। क्या बुजुर्ग और क्या युवा, सभी कान्हा के जन्मोत्सव की खुशी में झूमते दिखे। कई जगहों पर श्रद्धालु ढोलक और मंजीरों की थाप पर भजन-कीर्तन करते और नृत्य करते नजर आए।
रोशनी से जगमगा उठी कान्हा की नगरी इस खास मौके के लिए मथुरा के सभी प्रमुख मंदिरों को भव्य विद्युत लाइटों, ताजे फूलों और कलात्मक झांकियों से दुल्हन की तरह सजाया गया था। देश के कोने-कोने से पहुंचे भक्तों के लिए यह दृश्य अत्यंत भावुक और अलौकिक अनुभव बन गया।