
नयी दिल्ली, 23 सितंबर। घरेलू पर्यटन में तीर्थ यात्रा और धार्मिक स्थलों की यात्रा की हिस्सेदारी 48 फीसदी है जबकि खर्च के लिहाज से चिकित्सा पर्यटन सबसे आगे है।केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के एक सर्वेक्षण में यह बात समाने आई है। सर्वेक्षण जुलाई 2025 से जून 2026 के आंकड़ों पर आधारित है। इसमें यह जानने की कोशिश की गई है कि घरेलू पर्यटन के दौरान लोगों की प्राथमिकताएं क्या होती हैं और वे किन मदों पर कितना खर्च करते हैं।
मंत्रालय की बुधवार को जारी रिपोर्ट में कम से कम एक रात के ठहराव वाली यात्राओं के बारे में कहा गया है कि हर 100 यात्रा में से 48 तीर्थ यात्रा तथा अन्य धार्मिक उद्देश्यों के लिए की जाती है। स्वास्थ्य तथा चिकित्सा उद्देश्यों के लिए हर 100 में से 30 यात्राएं होती हैं। विशेष कर ग्रामीण इलाके के लोगों की 38 प्रतिशत यात्रा इसी उद्देश्य से होती है।वहीं शहरी इलाकों में लोग छुटियां मानाने और मौज-मस्ती के लिए 36 प्रतिशत यात्रा करते हैं। सर्वेक्षण में पाया गया कि इन यात्राओं की औसत अवधि 2.03 रातों की होती है। लगभग 80 प्रतिशत यात्री पांच दिन या उससे कम समय के लिए रुके थे।
यात्रा के लिए मई और अक्टूबर का महीना सबसे अधिक व्यस्त था। यहां उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 में दशहरा, दीपावली और छठ अक्टूबर में ही थे।ग्रामीण पर्यटकों में सबसे अधिक 32 प्रतिशत ने जहां अपनी यात्रा के लिए बस के सफर को चुना, वहीं, शहरी पर्यटकों में से 35 प्रतिशत ने ट्रेन से यात्रा की। शहरी पर्यटकों में 36 प्रतिशत अपने गंतव्य पर जाकर होटल या गेस्टहाउस में रुके जबकि ग्रामीण पर्यटकों में 28 प्रतिशत अपने दूसरे घर या नियोक्ता, धार्मिक या मिशनरी संगठनों द्वारा अस्थायी आवासों में ठहरे थे।
कम से कम एक रात के ठहराव वाली यात्राओं में चिकित्सा पर्यटन पर सबसे अधिक औसत खर्च दर्ज किया गया। ग्रामीण पर्यटकों ने इस श्रेणी में औसतन 29,454 रुपये और शहरी पर्यटकों ने 41,649 रुपये खर्च किए।