‘स्क्रीन टाइम’ बढ़ने से स्कूली बच्चों में मांसपेशियों, हड्डियों से जुड़ी समस्याओं में 40 फीसदी वृद्धि : विशेषज्ञ

‘स्क्रीन टाइम’ बढ़ने से स्कूली बच्चों में मांसपेशियों, हड्डियों से जुड़ी समस्याओं में 40 फीसदी वृद्धि : विशेषज्ञ

नयी दिल्ली, 24 सितंबर। स्कूली बच्चों में मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं में 40 फीसदी की वृद्धि हुई है।फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक बैठे रहना, स्क्रीन का अत्यधिक इस्तेमाल और शारीरिक गतिविधियों की गलत आदतें बच्चों में कमर दर्द की बढ़ती शिकायतों के कारण हो सकती हैं और इसके लिए केवल भारी स्कूल बैग को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (आईएपी) ने स्कूलों में शारीरिक फिटनेस, नियमित गतिविधियों, सही मुद्रा और बचाव के लिए फिजियोथेरेपी पर अधिक जोर देने की अपील की है।दिल्ली में आगामी सप्ताहांत आयोजित होने वाले वर्ल्ड फिजियोथेरेपी एशिया वेस्टर्न पैसिफिक रीजनल कॉन्फ्रेंस 2026 की आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. संजीव के. झा ने कहा, ” कमर दर्द बुढ़ापे में ही शुरू नहीं होता। हम स्कूली बच्चों में मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं में चिंताजनक 40 फीसदी वृद्धि देख रहे हैं। इससे हमें स्कूलों में बचाव आधारित स्वास्थ्य देखभाल के तरीके पर पुनर्विचार करना चाहिए। “

उन्होंने कहा कि आज बच्चे पढ़ाई, स्क्रीन के इस्तेमाल और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण लंबे समय तक बैठे रहते हैं। भारतीय अध्ययनों में भी स्कूली बच्चों में मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं के काफी अधिक होने की बात सामने आई है।भोपाल के चार स्कूलों के आठ से 15 वर्ष की आयु के 934 बच्चों पर किये गये एक अध्ययन में पाया गया कि 55.9 फीसदी बच्चों ने पिछले 12 महीनों के दौरान किसी न किसी तरह के दर्द का अनुभव किया, जबकि 21.3 फीसदी बच्चों ने इसके लिए चिकित्सकीय सहायता ली।

अध्ययन में पाया गया कि स्कूल बैग का औसत वजन छात्रों के शरीर के वजन का 16.5 फीसदी था। विशेषज्ञों ने बच्चों में कमर दर्द के लिए केवल भारी स्कूल बैग को जिम्मेदार ठहराने से सावधान किया है। उनके अनुसार, लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, शरीर को हिलाने-डुलाने का तरीका, पहले लगी चोटें और मनोसामाजिक कारक भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं।सम्मेलन की आयोजन सचिव डॉ रुचि वर्मा ने कहा, ” हमें बच्चों में कमर दर्द को पूरी तरह भारी स्कूल बैग की समस्या से नहीं जोड़ना चाहिए। बच्चों को नियमित शारीरिक गतिविधि, फिटनेस, मांसपेशियों की ताकत, लचीलापन और शरीर को सही तरीके से इस्तेमाल करने की आदत तथा इसके प्रति जागरूकता की जरूरत है।”आईएपी ने कहा कि स्कूल व्यायाम, एर्गोनॉमिक्स संबंधी जागरूकता, सही मुद्रा की शिक्षा, शुरुआती जांच और चोट से बचाव के जरिए रोकथाम संबंधी कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

वर्ल्ड फिजियोथेरेपी एशिया वेस्टर्न पैसिफिक रीजनल कॉन्फ्रेंस 2026 का आयोजन 26 और 27सितंबर को नयी दिल्ली के यशोभूमि में किया जाएगा।

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