अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखेगा ईरान: राष्ट्रपति पेज़ेशकियान

अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखेगा ईरान: राष्ट्रपति पेज़ेशकियान

तेहरान, 01 अक्टूबर। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने कहा है कि वार्ता प्रक्रिया के दौरान तीन बार हमले होने के बावजूद उनका देश अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता तलाशना जारी रखेगा।

समाचार एजेंसी तसनीम ने गुरुवार को उनके हवाले से यह जानकारी दी। उद्योगपतियों और उद्यमियों के साथ एक बैठक के दौरान राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने कहा कि ईरान ने कभी भी संवाद से दूरी नहीं बनाई है और न ही आगे ऐसा करेगा, भले ही अमेरिका ने वार्ता के दौरान ही उनके देश को तीन बार निशाना बनाया हो।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार व्यापारिक और व्यावसायिक क्षेत्रों को दरपेश समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर प्रयास कर रही है और देश का नेतृत्व आर्थिक कठिनाइयों से निपटने के लिए एकजुट होकर काम कर रहा है। श्री पेज़ेशकियान ने यह भी बताया कि समुद्री मार्गों पर लगी पाबंदियों के बीच ईरान पाकिस्तान, इराक, तुर्कमेनिस्तान और अजरबैजान सहित पड़ोसी देशों के माध्यम से नए व्यापारिक रास्तों का विस्तार करने का प्रयास कर रहा है।

राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही में आ रही रुकावटों के कारण वैश्विक ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग से उर्वरक शिपमेंट में व्यवधान के कारण दुनियाभर के नेताओं में वैश्विक खाद्य सुरक्षा को लेकर भारी आशंका पैदा हो गई है।

उधर ब्रुसेल्स में यूरोपीय संसद की विदेश मामलों की समिति को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव और ‘होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए संयुक्त राष्ट्र टास्क फोर्स’ के प्रमुख जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा ने कहा कि इस व्यवधान का वैश्विक ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ना शुरू हो गया है। खाड़ी देशों से मिलने वाले उर्वरक पर अत्यधिक निर्भरता के कारण सूडान, सोमालिया, मोजांबिक और तंजानिया जैसे विकासशील देश विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि उनकी उर्वरक आवश्यकताओं का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से आता है।

श्री सिल्वा के अनुसार इस संकट ने उर्वरकों की कीमतों में भारी उछाल दिया है और इनके उपयोग में गिरावट आई है, जिससे कृषि उत्पादकता घटने और खाद्य असुरक्षा गहराने का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि नौवहन की स्वतंत्रता पर व्यापक बातचीत जारी रहने के दौरान संयुक्त राष्ट्र ने एक ऐसा तंत्र प्रस्तावित किया है जिसके तहत उर्वरक ले जाने वाले जहाजों को पंजीकृत कर संघर्षरत पक्षों से समन्वय बनाकर एक सुरक्षित मार्ग प्रदान किया जा सके।

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