ज्ञानवापी परिसर में एएसआई सर्वेक्षण रोकने की अर्जी खारिज

ज्ञानवापी परिसर में एएसआई सर्वेक्षण रोकने की अर्जी खारिज

वाराणसी, 28 सितंबर। वाराणसी जिला न्यायालय ने गुरुवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से कराए जा रहे ज्ञानवापी परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण पर रोक लगाने की अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की अर्जी को खारिज कर दिया।
     वादी राखी सिंह के वकील अनुपम द्विवेदी ने कहा कि जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेशा की अदालत ने इंतेजामिया कमेटी की अर्जी को खारिज करते हुए कहा कि उनकी अदालत उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। अदालत ने इंतेज़ामिया कमेटी से कहा कि वह इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय जाएं।
     वकील ने कहा कि अदालत ने ज्ञानवापी परिसर के सील क्षेत्र के सर्वेक्षण के संबंध में एक आवेदन पर सुनवाई की अगली तारीख पांच अक्टूबर तय की है।
      गौरतलब है कि इंतेजामिया कमेटी ने एक आवेदन दायर कर एएसआई सर्वेक्षण को इस आधार पर रोकने का अनुरोध किया था कि वादी पक्ष यानी हिंदू पक्ष ने इसकी लागत जमा नहीं की थी।
     श्री द्विवेदी ने कहा कि अदालत ने मामले में अन्य वादी पक्ष द्वारा एएसआई द्वारा वैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान ज्ञानवापी परिसर से मिली वस्तुओं और सामग्रियों को संरक्षित करने का अनुरोध करने वाले एक आवेदन का भी निपटारा कर दिया।
     जिला न्यायाधीश ने कहा कि अदालत ने पहले ही प्रतिवादी राखी सिंह के आवेदन पर प्रशासन को निर्देश दे दिया है, इसलिए उनके आवेदन को मूल आवेदन के साथ समेकित किया जाएगा।
     गौरतलब है कि 14 सितंबर को जिला अदालत ने जिला प्रशासन को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान ज्ञानवापी परिसर से मिली वस्तुओं और सामग्रियों को संरक्षित करने का निर्देश दिया था।

राखी सिंह ने अपने आवेदन में प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी पर ज्ञानवापी परिसर से मिले साक्ष्यों को नष्ट करने का आरोप लगाया था।

     कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, “ सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए एएसआई द्वारा संबंधित स्थल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया जा रहा है। स्थल के सर्वेक्षण के दौरान जो वस्तुएं और सामग्रियां मिली हैं, क्या यह मामले से संबंधित है, या हिंदू धर्म या विधि या पूजा से संबंधित है या ऐतिहासिक या पुरातात्विक दृष्टिकोण से मामले के निपटारे में महत्वपूर्ण हो सकता है, एएसआई को ऐसी चीजों को जिला मजिस्ट्रेट या उनके द्वारा नामित अधिकारी को सौंपना चाहिए।”
     अदालत ने कहा था कि अधिकारी वस्तुओं को सुरक्षित रखेगा और जब भी अदालत उसे बुलाएगा, उसे अदालत में पेश करेगा। एएसआई सर्वेक्षण के दौरान मिली वस्तुओं की एक सूची तैयार करेगा और एक प्रति अदालत में जमा करेगा।

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