
लखनऊ, 29 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में नियुक्ति प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाने के लिए चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन की एकीकृत नीति जारी की है। इसके तहत चयनित अभ्यर्थियों को सामान्य मामलों में पुलिस सत्यापन पूरा होने से पहले भी शर्तों के साथ नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकेगा। सत्यापन रिपोर्ट अनुकूल मिलने पर नियुक्ति की पुष्टि की जाएगी।प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार, पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना) और जिलाधिकारियों को सत्यापन संबंधी संदर्भ प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध करानी होगी। निर्धारित अवधि में रिपोर्ट नहीं मिलने पर नियुक्ति प्राधिकारी मामला गृह विभाग को भेजेंगे। गृह विभाग रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
नई नीति के तहत नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यर्थियों से निर्धारित सत्यापन प्रपत्र और स्वघोषणा पत्र प्राप्त कर नियुक्ति पत्र जारी कर सकेंगे। हालांकि, सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील पदों पर विस्तृत सत्यापन पूरा होने के बाद ही नियुक्ति दी जाएगी। ऐसे मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत मुख्यमंत्री का पूर्व अनुमोदन लेना होगा।सरकार ने सामान्य परिस्थितियों में चरित्र सत्यापन के लिए अभ्यर्थियों को पुलिस या स्थानीय अभिसूचना इकाई के कार्यालय में बुलाने और उनके घर जाकर पूछताछ करने की व्यवस्था समाप्त की है। पुलिस उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर सत्यापन कर रिपोर्ट देगी।
सामान्य मामलों में अभ्यर्थियों से अतिरिक्त दस्तावेज भी नहीं मांगे जाएंगे। विशेष परिस्थितियों में नियुक्ति प्राधिकारी के अनुरोध पर जिलाधिकारी मौके पर जांच करा सकेंगे। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि केवल प्राथमिकी दर्ज होने, विवेचना लंबित रहने या आरोपपत्र दाखिल होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को स्वतः अयोग्य नहीं माना जाएगा। उसकी पात्रता अपराध की प्रकृति और न्यायालय में मामले की स्थिति के आधार पर तय होगी।निर्धारित श्रेणियों के गंभीर अपराधों में न्यायालय द्वारा आरोप तय होने या दोषसिद्धि की स्थिति में अयोग्यता लागू हो सकती है, जबकि अन्य श्रेणियों में दोषसिद्धि के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। न्यायालय से अंतिम रूप से दोषमुक्त होने, कानून के अनुसार समझौते से मामला निस्तारित होने और कुछ मामूली अपराधों के मामलों में भी निर्धारित शर्तों के तहत राहत का प्रावधान किया गया है।
हालांकि, अभ्यर्थियों को अपने विरुद्ध दर्ज मामलों की सही जानकारी देनी होगी। जानबूझकर तथ्य छिपाने या गलत घोषणा करने पर नियुक्ति निरस्त करने के साथ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार ने प्रतिकूल सत्यापन रिपोर्ट के मामलों में भी अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने की व्यवस्था की है। जिलाधिकारी नियुक्ति प्राधिकारी को रिपोर्ट भेजने से पहले संबंधित अभ्यर्थी की सुनवाई करेंगे। यह सुनवाई ऑनलाइन भी हो सकेगी।नई नीति के अनुसार, पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का दोबारा चरित्र सत्यापन नहीं कराया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर उनके पूर्व विभाग से जानकारी ली जा सकेगी। पिछले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश से बाहर एक वर्ष या उससे अधिक समय तक रहने वाले अभ्यर्थियों के संबंध में संबंधित राज्य की पुलिस से भी जानकारी प्राप्त की जाएगी।
यह नीति सरकारी विभागों के अलावा निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्त निकायों, उपक्रमों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती से होने वाली नियुक्तियों पर लागू होगी। पहले से लंबित सत्यापन मामलों का निस्तारण भी नए दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाएगा।