इंटरनेट सेवा प्रदाता के ऐप में ही कर सकेंगे शिकायत, अपील

इंटरनेट सेवा प्रदाता के ऐप में ही कर सकेंगे शिकायत, अपील

नयी दिल्ली, 02 नवंबर। इंटरनेट सेवा प्रदाता के खिलाफ शिकायत करने के लिए अब उसके ऐप में ही ऑनलाइन शिकायत और अपील का प्रावधान शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है।भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने शिकायत निवारण ढांचे को बेहतर बनाने के लिए ‘दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण (चौथा संशोधन) विनियम, 2026’ को अंतिम रूप दे दिया है। इसमें शिकायत पर अपील की समय सीमा 30 दिन से घटाकर 15 दिन की गई है। साथ ही इसके दायरे में आने वाले इंटरनेट सेवा प्रदाता के लिए टर्नओवर की शर्त की जगह सबस्क्राइबर की संख्या को आधार बनाया गया है।

प्राधिकरण ने बताया कि ये संशोधित विनियम उन इंटरनेट सेवा प्रदाताओं पर लागू होंगे, जिनके पास पिछले वित्त वर्ष के अंतिम दिन तक 10 हजार से अधिक सब्सक्राइबर थे। पांच करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक वित्तीय टर्नओवर पर आधारित वैकल्पिक मानदंड को हटा दिया गया है।अब उपभोक्ता शिकायत केंद्र, वेबसाइट और वेब पोर्टल जैसे मौजूदा माध्यमों के अलावा सेवा प्रदाता के मोबाइल एप्लिकेशन के जरिये भी शिकायतें और अपील दर्ज करा सकेंगे, सेवाओं के लिए अनुरोध कर सकेंगे और सेवा से जुड़े सवाल पूछ सकेंगे। इससे उपभोक्ताओं को शिकायत और अपील दर्ज कराने के लिए अधिक विकल्प, लचीलापन और आसानी मिलेगी।

एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत शिकायत केंद्रों के माध्यम से उपभोक्ता सहायता अब सप्ताह के सातों दिन, चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगी। पहले यह सुविधा केवल 16 घंटे के लिए थी। नये नियमों के अनुसार, यह सहायता मानव प्रतिनिधियों, स्वचालित प्रणालियों, एआई एजेंटों, ग्राहकों पर केंद्रित अन्य तकनीकी समाधानों या इनके संयोजन के माध्यम से दी जा सकती है।

मानव सहायता प्रतिदिन कम से कम 16 घंटे उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है। साथ ही कहा गया है कि तकनीक-आधारित समाधान उचित मानवीय निगरानी के साथ काम करेंगे। प्रत्येक सेवा प्रदाता को अपने शिकायत केंद्र या उपभोक्ता सहायता केंद्र में ऐसे समर्पित डेस्क या हेल्पलाइन की व्यवस्था करनी होगी, जहां कर्मचारी या सहायक तकनीक मौजूद हो, जो दिव्यांग व्यक्तियों की कॉल प्राप्त करने में सक्षम हो।

इस संशोधन के जरिये ‘अपीलीय प्राधिकरण’ को और अधिक जिम्मेदार बनाया गया है। यह अनिवार्य कर दिया गया है कि अपीलीय प्राधिकरण में एक या एक से अधिक ऐसे व्यक्ति शामिल होंगे जो सेवा प्रदाता के प्रबंधन में नियमित कर्मचारी हैं और जिनके पास कम से कम पांच साल का अनुभव है। अपीलीय प्राधिकरण अपील की जांच करेगा, शिकायत के समाधान के लिए उचित कार्रवाई करेगा और अपील प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपना अंतिम निर्णय सूचित करेगा।’फीडबैक सर्वे’ (प्रतिक्रिया सर्वेक्षण) की एक नई व्यवस्था शुरू की गई है। किसी शिकायत या अपील के समाधान या बंद होने पर सेवा प्रदाता एक ऑनलाइन फीडबैक सर्वे कराएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि उपभोक्ता समाधान से कितना संतुष्ट है। सेवा प्रदाता को ऐसे फीडबैक सर्वे के परिणाम अपनी वेबसाइट पर हर तिमाही प्रकाशित करने होंगे।प्रत्येक सेवा प्रदाता को शिकायतों और अपीलों के समाधान तथा फीडबैक सर्वे के परिणामों की एक तिमाही रिपोर्ट अपने मुख्य कार्यकारी अधिकारी या निदेशक मंडल के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

‘उपभोक्ता शिकायत निवारण निगरानी समिति’ की एक नई व्यवस्था शुरू की गई है। प्रत्येक सेवा प्रदाता अपनी शिकायत निवारण प्रणाली के कामकाज की निगरानी करने और समय-समय पर उसकी समीक्षा करने के लिए इस समिति का गठन करेगा। समिति में सेवा प्रदाता के प्रतिनिधि शामिल होंगे। साथ ही, लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में प्राधिकरण के साथ पंजीकृत प्रत्येक उपभोक्ता संगठन से कम से कम एक प्रतिनिधि इसमें शामिल होगा।

इस संशोधन में ‘नियामक समीक्षा’ की एक नई व्यवस्था भी जोड़ी गई है। प्राधिकरण, सेवा प्रदाताओं के शिकायत निवारण तंत्र के कामकाज की समय-समय पर समीक्षा कर सकता है। वह सेवा प्रदाता के रिकॉर्ड का ऑडिट और निरीक्षण कर सकेगा, सेवा प्रदाता द्वारा जमा की गई तिमाही रिपोर्ट का ऑडिट और विश्लेषण करेगा और उपभोक्ता फीडबैक के आधार पर समीक्षा करेगा। तिमाही रिपोर्ट जमा न करने या उसे देर से जमा करने की स्थिति में आर्थिक दंड का भी प्रावधान है।

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