
अमरोहा 07 दिसंबर । भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था गन्ना एवं चीनी उद्योग पर टिकी है। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वह गन्ने की होली जलाएं और न ही दूध फसल उत्पादों को सड़कों पर फेंके।
नौगांवां सादात में शनिवार को आयोजित किसान पंचायत को संबोधित करते हुए भाकियू (संयुक्त मोर्चा) राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने मौजूदा 2024-25 के पेराई सत्र में गन्ना मूल्य वृद्धि को ऊंट के मुंह में जीरा बताया। उन्होंने कहा कि गन्ना एवं चीनी उद्योग पर टिकी है प्रदेश की अर्थव्यवस्था। देश भर में उगाए जाने वाले गन्ने के कुल क्षेत्र में 48 फीसदी हिस्सेदारी अकेले उत्तर प्रदेश की है और यह कुल उत्पादन में 50 फीसदी का योगदान है।
श्री चौधरी ने कहा कि प्रदेश के 44 जिलों में 37 लाख़ किसानों के 2.67 करोड़ पारिवारिक सदस्यों की आजीविका का मुख्य स्रोत गन्ने की खेती ही है। चालू वित्तीय वर्ष में 29.66 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती हुई है और उत्पादकता भी बढ़कर 84.05 टन प्रति क्विंटल तक पहुंच गई, जबकि वर्ष 2019-20 में प्रदेश में गन्ने का क्षेत्रफल 26.79 लाख हेक्टेयर और उत्पादकता 81.10 प्रति हेक्टेयर थी। एथनॉल जैसे बाई प्रोडक्ट को बढ़ावा देने से चीनी मिलों की स्थिति में सुधार हुआ है। चालू वित्तीय वर्ष में 180 करोड़ लीटर एथनाॅल उत्पादन का आंकलन किया गया है जबकि बीते वर्ष 153.71 करोड़ लीटर का उत्पादन प्रदेश में हुआ था।
इस तरह पिछले सात वर्षों में एथनाॅल उत्पादन में करीब चार गुणा की वृद्धि हुई है। वर्ष 2016 -17 में प्रदेश में एथनाल का उत्पादन महज़ 42.69 करोड़ लीटर ही था। पिछले वर्षों के रिकॉर्ड देखें तो उत्तर प्रदेश, भारत में सबसे ज्यादा रिकवरी देने में अव्वल है, लेकिन पंजाब,हरियाणा व उत्तराखंड जैसे छोटे राज्यों की तुलना में गन्ना मूल्य में उत्तर प्रदेश पीछे है। यानी कीमतें अब भी कम हैं।
उन्होंने कहा कि इन बातों की पुष्टि सरकारी आंकड़ों से भी होती है जबकि गन्ने से एथनाल के अलावा चीनी, शराब, बिजली, गैस आदि का उत्पादन चीनी मिलों द्वारा लिया जा रहा है। उत्पादन लागत से गन्ना मूल्य कम होने की वज़ह से किसानों को लगातार घाटा हो रहा है। श्री चौधरी ने कहा कि गन्ने का भाव चीनी मूल्य के आधार पर नहीं बल्कि सह उत्पादों के आधार पर तय किया जाना चाहिए।
उन्होंने सरकार से गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य 450 प्रति क्विंटल बढाने की मांग की। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों की ख़ासतौर से जो दिक्कतें हैं लागत को मद्देनजर रखते सही मूल्य और समय पर गन्ना मूल्य भुगतान, गन्ना पर्चियों में सुधार तथा घटतौली को रोकने में सरकार विफल रही है। इस मामले में चीनी मिलों की मनमानी बरकरार है। घटतौली पहले भी होती थी और अब भी हो रही है। वहीं भुगतान के मामले में कुछ चीनी मिलों का रवैया अभी भी नहीं सुधरा है। सरकार कृषि और किसानों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाए जिससे किसान खुशहाल हो। परंतु अभी तक सरकार द्वारा गन्ना मूल्य घोषित नहीं करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
किसान पंचायत को संबोधित करने वालों में मुख्य रूप से भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजवीर सिंह, मंडलाध्यक्ष मयंक धारीवाल, सचिव अरुण सिद्धू , युवा मोर्चे के अध्यक्ष रवि चौधरी समेत स्थानीय किसान शामिल रहे।