इलाहाबाद उच्च न्यायालय से यूपीसीए को बड़ी राहत, सीएयूपी की याचिका खारिज

इलाहाबाद उच्च न्यायालय से यूपीसीए को बड़ी राहत, सीएयूपी की याचिका खारिज

लखनऊ, 03 अगस्त । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने द क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश (सीएयूपी) की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उसने आरोप लगाया था कि वर्ष 2005 में तत्कालीन सोसाइटी के विघटन तथा उसकी परिसंपत्तियों, दायित्वों एवं कार्यों का उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) को हस्तांतरण विधिसम्मत नहीं था।

यूपीसीए की मीडिया समिति के सह-अध्यक्ष डॉ. संजय कपूर ने सोमवार को अदालत के फैसले की जानकारी देते हुये बताया कि न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने अपने निर्णय में माना कि वर्ष 2005 में तत्कालीन सोसाइटी के विघटन तथा उसकी परिसंपत्तियों, दायित्वों एवं कार्यों का उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन कंपनी को हस्तांतरण विधिसम्मत था।खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया के लिए राज्य सरकार की अनुमति आवश्यक नहीं थी, क्योंकि सरकार यह स्थापित नहीं कर सकी कि संबंधित संस्था में उसका कोई वित्तीय योगदान अथवा वैधानिक हित था।न्यायालय ने याचिकाकर्ता की उन सभी प्रमुख मांगों को भी खारिज कर दिया, जिनमें यूपीसीए की परिसंपत्तियां एवं संसाधन सीएयूपी को हस्तांतरित करने, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को निर्देश जारी करने, यूपीसीए को क्रिकेट गतिविधियों के संचालन से रोकने, मामले की सीबीआई अथवा किसी अन्य एजेंसी से जांच कराने तथा यूपीसीए की बीसीसीआई से संबद्धता और वित्तीय सहायता की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग शामिल थी।

अपने फैसले में न्यायालय ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) पिछले लगभग दो दशकों से बीसीसीआई का पूर्ण सदस्य है तथा उसे बोर्ड में मतदान का अधिकार भी प्राप्त है। फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डॉ. कपूर ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय का यह निर्णय यूपीसीए की वैधानिक स्थिति को स्पष्ट करता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सीएयूपी ने यूपीसीए से मिलता-जुलता नाम इस्तेमाल कर स्वयं को प्रदेश की मान्यता प्राप्त क्रिकेट संस्था के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया, जिससे खिलाड़ियों, जिला क्रिकेट संघों और आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई।डॉ. कपूर ने कहा कि न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि यूपीसीए का गठन, पुरानी सोसाइटी की परिसंपत्तियों एवं दायित्वों का हस्तांतरण तथा बीसीसीआई से उसकी संबद्धता विधिसम्मत और स्थापित व्यवस्था के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि अब इस विवाद को समाप्त कर सभी पक्षों को उत्तर प्रदेश में क्रिकेट और खिलाड़ियों के विकास के लिए सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिये।

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